
नई दिल्ली ।वैश्विक कॉरपोरेट जगत में भारतीय मूल (Indian Origin) के पेशेवरों की बढ़ती मौजूदगी एक बार फिर चर्चा का विषय बनी हुई है। दुनिया की कई प्रतिष्ठित कंपनियों (Prestigious Companies) के शीर्ष नेतृत्व (Leadership) में भारतीय प्रतिभाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। हाल ही में इस सूची में एक और प्रमुख नाम जुड़ने से यह संकेत और मजबूत हुआ है कि वैश्विक स्तर पर रणनीतिक नेतृत्व, तकनीकी नवाचार (Technological Innovation) और कारोबारी विस्तार (Business Expansion) के लिए भारतीय पेशेवरों पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
फिनटेक क्षेत्र से अपनी पहचान बनाने वाले कुणाल शाह की वैश्विक टेक नेतृत्व में नई भूमिका ने इस चर्चा को नई गति दी है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब दुनिया की बड़ी डिजिटल और टेक कंपनियां कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड सेवाओं, डेटा प्रबंधन और वैश्विक संचार प्लेटफॉर्म के विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय उद्यमियों और पेशेवरों की विश्लेषण क्षमता, तकनीकी समझ और बड़े पैमाने पर संचालन प्रबंधन की दक्षता उन्हें वैश्विक नेतृत्व के लिए मजबूत दावेदार बनाती है।
पिछले एक दशक में भारतीय मूल के कई पेशेवर दुनिया की सबसे प्रभावशाली कंपनियों के शीर्ष पदों तक पहुंचे हैं। इस बदलाव को व्यापक रूप से उस दौर से जोड़ा जाता है जब भारतीय नेतृत्व ने वैश्विक टेक उद्योग में निर्णायक उपस्थिति दर्ज करानी शुरू की। इसके बाद से तकनीक, क्लाउड कंप्यूटिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में भारतीय विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ती गई। आज स्थिति यह है कि दुनिया की कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सीईओ, सीटीओ, सीएफओ और बोर्ड सदस्य भारतीय मूल से आते हैं।
तकनीकी क्षेत्र के अलावा भारतीयों ने वित्तीय सेवाओं, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य सेवाओं, उपभोक्ता उत्पादों और वैश्विक परामर्श उद्योग में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई है। बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों से लेकर लक्जरी ब्रांड और उन्नत चिप डिजाइन कंपनियों तक, भारतीय मूल के अधिकारी रणनीतिक फैसलों और वैश्विक विस्तार योजनाओं का नेतृत्व कर रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय प्रतिभा का प्रभाव अब केवल सॉफ्टवेयर उद्योग तक सीमित नहीं रह गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय पेशेवरों की सफलता के पीछे मजबूत तकनीकी शिक्षा, वैश्विक दृष्टिकोण और जटिल समस्याओं को हल करने की क्षमता प्रमुख कारण हैं। देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों और विश्वविद्यालयों से निकलने वाले छात्र विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम साबित हुए हैं। यही वजह है कि अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई विकसित देशों में भारतीय मूल के पेशेवर शीर्ष प्रबंधन पदों तक पहुंच रहे हैं।
उच्च शिक्षा और वैश्विक अवसरों के लिए विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या भी इस प्रवृत्ति को मजबूत करती है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार बड़ी संख्या में भारतीय छात्र विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद वैश्विक कंपनियों, शोध संस्थानों और विश्वविद्यालयों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। इनमें से अनेक लोग आगे चलकर कॉरपोरेट नेतृत्व, अनुसंधान और नवाचार के प्रमुख चेहरों के रूप में उभरते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल संचार, साइबर सुरक्षा और उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में भारतीय नेतृत्व की भूमिका और अधिक मजबूत हो सकती है। वैश्विक कंपनियों में बढ़ती भारतीय भागीदारी न केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों की कहानी है, बल्कि यह भारत की शिक्षा, तकनीकी क्षमता और वैश्विक प्रतिभा की स्वीकार्यता का भी महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।
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