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जज, न्यायिक कर्मचारी के साथ वकील भी करें कार पुलिंग

June 25, 2026

  • ईंधन की बचत को लेकर मप्र हाई कोर्ट ने जारी किया सर्कुलर

उज्जैन। पेट्रोल-डीजल के बढ़ते संकट के बीच मप्र हाई कोर्ट ने अहम कदम उठाते हुए एक सर्कुलर जारी किया है। इसमें जजों, न्यायिक कर्मचारियों के साथ ही वकीलों से भी कार-पुलिंग को बढ़ावा देने के साथ अन्य उपाय करने को कहा गया है।



  • एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया के निर्देश पर रजिस्ट्रार जनरल धर्मेन्दर सिंह द्वारा यह सर्कुलर जारी किया गया है। इसमें बताया गया कि भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के 12 मई 2026 के ऑफिस मेमोरेंडम तथा सुप्रीम कोर्ट द्वारा 15 मई को जारी सर्कुलर को ध्यान में रखते हुए सुझाव दिए गए हैं। इसका मकसद रजिस्ट्री अधिकारियों, वकीलों, मध्यप्रदेश हाई कोर्ट (जबलपुर और इंदौर व ग्वालियर बेंच) के अधिकारियों और कर्मचारियों तथा जिला न्यायपालिका (जिसमें न्यायिक अधिकारी, वकील और स्टाफ शामिल हैं) द्वारा ईंधन की खपत को कम करना, साथ ही न्यायिक, प्रशासनिक और कोर्ट से जुड़े कामकाज को बिना किसी रुकावट के जारी रखना है।

    ये हैं सर्कुलर के मुख्य बिंदु

    • पुलिंग वाहनों का इस्तेमाल हाई कोर्ट और जिला अदालतों के न्यायिक और प्रशासनिक कामकाज से जुड़े जरूरी सरकारी कामों के लिए किया जाएगा।
    • हाई कोर्ट और जिला अदालतों में एक ही या आस-पास के इलाकों में रहने वाले रजिस्ट्री अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी इसी तरह की वाहन-पुलिंग की व्यवस्था की जा सकती है।
    • अदालती कार्यवाही में शामिल होने वाले वकीलों को जहां तक संभव हो, शेयर्ड ट्रांसपोर्ट, पब्लिक ट्रांसपोर्ट या कार/टू-व्हीलर पुलिंग सुविधाओं का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
    • जरूरी मामलों, प्रोटोकॉल की जरूरतों, सुरक्षा चिंताओं, मेडिकल इमरजेंसी या अन्य अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर, अलग-अलग अधिकारियों या कर्मचारियों के लिए अलग-अलग वाहन लगाने से बचा जा सकता है।
    • वाहनों की आवाजाही कम करने के लिए, जहां भी संभव हो, सरकारी बैठकें, प्रशासनिक चर्चाएं और वकीलों के साथ बातचीत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की जा सकती है।
    • उपलब्धता के आधार पर, ज्यादा इस्तेमाल होने वाले रूटों पर कर्मचारियों और वकीलों के लिए मिनी बस, ट्रैवलर या अन्य उपयुक्त वाहनों जैसी कॉमन ट्रांसपोर्ट सुविधाओं की व्यवस्था की जा सकती है।
    • वकीलों से अनुरोध/प्रोत्साहन किया जाता है कि वे ईंधन बचाने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपने मामले पेश करें, ताकि यात्रा को कम करके और ईंधन की कुल खपत को घटाकर राष्ट्रीय ऊर्जा-बचत निर्देशों का पालन किया जा सके।

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