लखनऊ। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने प्रदेश संगठन की नई टीम का ऐलान कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी (Uttar Pradesh) की नियुक्ति के करीब सात महीने बाद घोषित की गई इस कार्यकारिणी को सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से तैयार किया गया है। पार्टी की कोशिश पिछड़े, दलित और गैर-यादव ओबीसी वर्गों में अपनी पकड़ मजबूत करने के साथ-साथ समाजवादी पार्टी (SP) के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण का जवाब देने की है।
बीजेपी ने प्रदेश संगठन में छह क्षेत्रीय अध्यक्ष, 19 उपाध्यक्ष, आठ महामंत्री और 19 प्रदेश मंत्रियों की नियुक्ति की है। पार्टी ने एक ओर अपने पारंपरिक सवर्ण वोट बैंक को प्रतिनिधित्व दिया है, वहीं दूसरी ओर ओबीसी और दलित समुदाय के नेताओं को भी बड़ी संख्या में संगठन में शामिल कर सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है।
नई टीम में लगभग 40 प्रतिशत पद ठाकुर, ब्राह्मण, भूमिहार और कायस्थ समाज के नेताओं को मिले हैं, जबकि बड़ी संख्या में ओबीसी और दलित नेताओं को भी जिम्मेदारी देकर व्यापक सामाजिक संदेश देने का प्रयास किया गया है।
छह क्षेत्रों में नए अध्यक्ष, ओबीसी पर खास फोकस
उत्तर प्रदेश बीजेपी ने अपने सभी छह क्षेत्रीय अध्यक्ष बदल दिए हैं। इनमें चार ओबीसी और दो सवर्ण समुदाय से हैं।
पश्चिम क्षेत्र की जिम्मेदारी नवाब सिंह नागर (गुर्जर) को दी गई है।
ब्रज क्षेत्र की कमान पूरन लाल लोधी को सौंपी गई है।
कानपुर क्षेत्र का अध्यक्ष राम किशोर साहू (तैली समाज) को बनाया गया है।
काशी क्षेत्र की जिम्मेदारी अशोक चौरसिया को मिली है।
अवध क्षेत्र के अध्यक्ष अवधेश द्विवेदी बनाए गए हैं।
गोरखपुर क्षेत्र की कमान विनोद राय को सौंपी गई है।
इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी ने पश्चिम से लेकर पूर्वांचल तक विभिन्न सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है।
दलित और ओबीसी नेताओं को प्रमुख जिम्मेदारियां
नई कार्यकारिणी में 19 उपाध्यक्षों में सात ओबीसी और दो दलित समुदाय से हैं। आठ महामंत्रियों में चार ओबीसी, एक दलित, दो ब्राह्मण और एक ठाकुर समाज से हैं। वहीं 19 प्रदेश मंत्रियों में नौ ओबीसी और तीन दलित नेताओं को स्थान दिया गया है। पार्टी ने विशेष रूप से उन जातीय समूहों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है, जिनके बीच 2024 के लोकसभा चुनाव में उसका जनाधार कमजोर पड़ा था।
2024 के नुकसान की भरपाई का लक्ष्य
लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी को उत्तर प्रदेश में बड़ा झटका लगा था। 80 सीटों वाले राज्य में पार्टी 33 सीटों पर सिमट गई, जबकि समाजवादी पार्टी ने 37 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने में सफलता हासिल की। इसके बाद से बीजेपी लगातार अपने सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
सपा के PDA फॉर्मूले का जवाब
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समीकरण को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसी सामाजिक गठजोड़ ने 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा को बड़ी सफलता दिलाई थी।
बीजेपी ने नई प्रदेश टीम के गठन में गैर-यादव ओबीसी, दलित और पारंपरिक सवर्ण वोट बैंक के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि सामाजिक प्रतिनिधित्व बढ़ाकर वह 2027 के विधानसभा चुनाव में अपने खोए हुए जनाधार को दोबारा मजबूत कर सकती है।
पंकज चौधरी के सामने बड़ी चुनौती
ओबीसी समुदाय से आने वाले प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में बीजेपी अब 2027 का चुनाव लड़ेगी। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती 2024 में कमजोर पड़े सामाजिक आधार, खासकर गैर-यादव ओबीसी और दलित वर्ग के बीच पार्टी की पकड़ को फिर से मजबूत करना है। इसी उद्देश्य से नई प्रदेश कार्यकारिणी में सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए व्यापक बदलाव किए गए हैं।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved