
उज्जैन। जिले में पिछले 10 सालों में 150 बच्चे गायब हुए हैं। यह खुलासा पुलिस विभाग से मिली जानकारी के आधार पर हुआ है। चौकाने वाली बात यह है कि गायब बच्चों में लड़कियों की संख्या लड़कों की संख्या की तुलना में लगभग 4 गुना है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले दस सालों में उज्जैन में 150 से ज्यादा बच्चे गायब हुए हैं। गायब हुए बच्चों में 120 लड़कियाँ हैं और शेष लड़के हैं। सभी लापता बच्चों के मामले में गुमशुदगी जिलों के अलग-अलग थानों में दर्ज कराई गई हैं लेकिन कुछ मामलों में तो अभी तक पुलिस को सुराग नहीं मिले हैं। मामले में कानून के जानकारों का कहना है कि पुलिस बच्चों की गुमशुदगी के मामले में परिवार वालों को ही उनकी तलाश का जिम्मा सौंपती हैं। एक वजह यह भी है कि गुमशुदगी के मामले गंभीर श्रेणी में नहीं आने की वजह से बच्चों की तलाश के लिए पुलिस के पास ज्यादा वक्त नहीं रहता है। बच्चों के लापता होने के मामले में पुलिस को सीधे अपहरण की एफआईआर दर्ज करना चाहिए। बता दें कि यह मुद्दा लोकसभा संसद में भी कई बार उठाया गया। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधिक है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक मामले में प्रदेश आंकड़ों के मुताबिक सबसे अधिक बच्चे मध्यप्रदेश से गायब हुए हैं। गायब बच्चों की संख्या 65 हजार है। मध्यप्रदेश के जिलों में नंबर वन पर इंदौर है। एमपी में सबसे ज्यादा बच्चे यहीं से लापता हुए हैं। इसके अलावा भोपाल, धार, जबलपुर, रीवा और आए हैं। हैरानी की बात यह है कि लापता बच्चों में उज्जैन में भी बच्चों के लापता होने के मामले सामने लड़कियों की संख्या लड़कों की तुलना में 4 गुना अधिक है।
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