
जबलपुर। जबलपुर नगर निगम में इन दिनों भ्रष्टाचार और दस्तावेजों में हेरफेर का मामला सुर्खियों में है। निगम में पंप ऑपरेटर के पद पर पदस्थ कर्मचारी व कर्मचारी नेता अमित मेहरा की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। शिकायतकर्ता द्वारा नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव को दी गई शिकायत में खुलासा हुआ है कि अमित मेहरा ने अपनी सेवा पुस्तिका में दो अलग-अलग जन्मतिथियों का उपयोग किया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि उनके पास इस बात के ठोस प्रमाण हैं कि अमित मेहरा के दस्तावेजों में एक जगह जन्मतिथि 20/11/1986 और दूसरी जगह 20/11/1997 दर्ज है। अमित मेहरा की एईबीएएस आईडी 80420751 है। उन पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी अंक सूचियों और विरोधाभासी दस्तावेजों के आधार पर न केवल सरकारी सेवा हासिल की, बल्कि पद पर बने रहने के लिए शैक्षणिक योग्यताओं में भी धांधली की है। इस पूरे मामले ने निगम प्रशासन की पारदर्शिता को कटघरे में खड़ा कर दिया है और अब पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है।
दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं
अमित मेहरा द्वारा सेवा में प्रवेश के दौरान जमा की गई अंक सूचियां और जन्मतिथि के प्रमाण पत्र प्रथम दृष्टया संदिग्ध प्रतीत हो रहे हैं। शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि एक ही व्यक्ति की दो अलग अलग जन्मतिथियां होना अपने आप में गंभीर धोखाधड़ी का संकेत है। इस मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए अमित मेहरा की मूल सेवा पुस्तिका, नियुक्ति आदेश और जॉइनिंग रिपोर्ट का फॉरेंसिक ऑडिट अनिवार्य हो गया है। साथ ही उनकी शैक्षणिक दस्तावेजों का संबंधित बोर्ड से सत्यापन करवाना आवश्यक है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उन्होंने कब और कौन सी परीक्षा पास की है। यदि इन दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा पाया जाता है, तो इसके लिए जिम्मेदार उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने इन दस्तावेजों की जांच के दौरान आंखें मूंद लीं और फाइलें आगे बढ़ा दीं।
अवैध कार्यालय बनाकर खेला जा रहा कमीशन का खेल
नगर निगम परिसर में अमित मेहरा द्वारा कथित रूप से एक अनधिकृत कार्यालय का संचालन किया जा रहा है, जहाँ से वे पूरी व्यवस्था को नियंत्रित करने का प्रयास करते हैं। आरोप है कि अमित मेहरा अधिकारियों पर दबाव बनाकर फाइलों को अपनी मर्जी से रुकवाते हैं या आगे बढ़ाते हैं। प्रमोशन, जीपीएफ एरियर और अन्य लंबित भुगतान की फाइलों के एवज में उनसे अवैध वसूली के गंभीर आरोप भी लगे हैं। निगम परिसर के भीतर कार्यालय बनाकर बैठना और सरकारी कामकाज में हस्तक्षेप करना उनके रसूख को दर्शाता है। शिकायतकर्ता का कहना है कि मेहरा ने अपनी पहुंच का दुरुपयोग करके आउटसोर्स ठेकेदारों और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों से भी कमीशन का खेल खेला है, जिसे रोकने के लिए तत्काल प्रभाव से उन्हें इन जिम्मेदारियों से हटाना जरूरी है।
दो सिक्योरिटी एजेंसियों की भूमिका भी संदिग्ध
भ्रष्टाचार का यह जाल केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आउटसोर्स ठेकेदारों की भी संलिप्तता सामने आ रही है। एक्स सर्विसमैन सिक्योरिटी सर्विस के मालिक की भूमिका इस पूरे प्रकरण में संदिग्ध बताई गई है। आरोप है कि कुछ लोगों को निजी काम में लगाकर उनका वेतन निगम के खजाने से निकाला गया, जो सीधे तौर पर सरकारी धन का गबन है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि अक्टूबर 2025 से मई 2026 तक के उपस्थिति रिकॉर्ड और कार्यस्थल की बारीकी से जांच हो। स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज किए जाएं ताकि यह पता चल सके कि किस तरह से इन सिक्योरिटी एजेंसियों के साथ मिलकर फर्जी उपस्थिति दर्ज कराकर वेतन का आहरण किया गया। इस पूरे तंत्र को तोडऩे के लिए शासन को सख्त अनुशासनात्मक और आपराधिक कार्रवाई करनी चाहिए।
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