नई दिल्ली। इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp एक ऐसे फीचर पर काम कर रहा है, जिससे यूजर्स भविष्य में अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना भी चैट शुरू कर सकेंगे। इस फीचर के तहत इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (Social media platform) की तरह प्रत्येक यूजर अपना एक यूनिक यूजरनेम (Unique username) बना सकेगा। हालांकि, इस संभावित बदलाव को लेकर भारत में बहस छिड़ गई है। कुछ विशेषज्ञों और कंटेंट क्रिएटर्स का मानना है कि इससे फर्जी प्रोफाइल और ऑनलाइन ठगी के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, WhatsApp ऐसे फीचर की टेस्टिंग कर रहा है जिसमें यूजर अपनी प्रोफाइल के लिए एक यूनिक यूजरनेम चुन सकेंगे। इसके बाद लोगों से संपर्क करने के लिए मोबाइल नंबर साझा करना जरूरी नहीं होगा। उद्देश्य यह है कि यूजर्स की प्राइवेसी बेहतर हो और वे बिना नंबर सार्वजनिक किए बातचीत कर सकें।
अंकुर वारिकू ने जताई चिंता
उद्यमी और कंटेंट क्रिएटर अंकुर वारिकू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस फीचर को लेकर चिंता जाहिर की। उनका कहना है कि यदि मजबूत सत्यापन (Verification) और सुरक्षा व्यवस्था नहीं बनाई गई तो भारत जैसे बड़े डिजिटल बाजार में फर्जी यूजरनेम बनाकर लोगों को ठगना आसान हो सकता है।
वारिकू के मुताबिक, स्कैमर्स किसी सेलिब्रिटी, बिजनेस लीडर या लोकप्रिय इन्फ्लुएंसर से मिलते-जुलते यूजरनेम बनाकर लोगों को धोखा देने की कोशिश कर सकते हैं। उनका तर्क है कि यदि मोबाइल नंबर दिखाई नहीं देगा तो आम यूजर के लिए असली और नकली अकाउंट के बीच अंतर करना और कठिन हो सकता है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पहले भी उनके नाम और तस्वीर का इस्तेमाल कर फर्जी ऑनलाइन विज्ञापनों के जरिए लोगों को ठगने की कोशिश की गई थी।
ध्रुव राठी ने भी उठाए सवाल
यूट्यूबर ध्रुव राठी ने भी इस फीचर को लेकर Meta की नीतियों पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कंपनी के अन्य प्लेटफॉर्म पर पहले से फर्जी विज्ञापन और ऑनलाइन स्कैम की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में उनका मानना है कि WhatsApp पर नया फीचर लागू होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था बेहद मजबूत होनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर बंटी राय
इस मुद्दे पर इंटरनेट यूजर्स की राय भी बंटी हुई है। एक वर्ग का कहना है कि यूजरनेम आधारित पहचान पहले से X, Facebook, Instagram और Telegram जैसे प्लेटफॉर्म पर मौजूद है, इसलिए WhatsApp में इसे लेकर जरूरत से ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए।
वहीं, दूसरे यूजर्स का मानना है कि WhatsApp का इस्तेमाल निजी और पारिवारिक बातचीत के लिए सबसे ज्यादा होता है। ऐसे में यदि पहचान सत्यापित करने की मजबूत व्यवस्था नहीं हुई तो साइबर ठगी के नए तरीके सामने आ सकते हैं।
क्या बढ़ेगा खतरा?
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि नया फीचर स्कैम बढ़ाएगा या नहीं। किसी भी नए सिस्टम की सुरक्षा इस बात पर निर्भर करेगी कि WhatsApp फर्जी यूजरनेम, प्रतिरूपण (Impersonation), अकाउंट सत्यापन और शिकायत निवारण के लिए कितने प्रभावी सुरक्षा उपाय लागू करता है।
भारत में WhatsApp के करोड़ों सक्रिय यूजर्स हैं। ऐसे में यदि यह फीचर व्यापक स्तर पर जारी किया जाता है, तो उसके साथ मजबूत सुरक्षा और पहचान सत्यापन तंत्र भी अहम भूमिका निभाएगा।
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