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उज्जैन। शहर में चौड़ीकरण के लिए तीन साल में सैकड़ों बड़े पेड़ काट दिए और दावा किया गया था कि उन्हें ट्रांसप्लांट किया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उल्लेखनीय है कि उज्जैन में विकास के नाम पर अब तक हजारों पेड़ काट दिए गए हैं, लेकिन अभी तक यहां हरियाली के पौधे नहीं लगाए गए हैं। इसकी वजह से उज्जैन में पर्यावरण संतुलन तेजी से बिगड़ता जा रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर पक्षियों पर पड़ रहा है।
पेड़ों की बेतहाशा कटाई की वजह से कई पक्षियों की प्रजातियाँ शहर से विलुप्त होती जा रही हैं। यह एक गंभीर समस्या है। दूसरी तरफ हरियाली खत्म होने से मौसम पर भी इसका असर पड़ रहा है। खासतौर से जहाँ पहले घने पेड़ होते थे, कटाई के बाद वहाँ तापमान में भी 3 से 5 डिग्री तक का अंतर आ गया है। वहीं शहर में आए दिन पेड़ काटने की घटनाएं सामने आ रही हैं। लेकिन जिम्मेदार विभाग चुप्पी साधे हुए हैं। एक जानकारी के मुताबिक जर्मनी में पेड़ों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए विशेष मशीनों का उपयोग किया जाता है। इन मशीनों को ट्री ट्रांसप्लांटर या ट्री स्पेड कहा जाता है। ये मशीनें बड़े पेड़ों को भी आसानी से उखाड़कर, बिना बिना नुकसान पहुँचाए, दूसरी जगह लगा सकती हैं। जर्मनी में इन मशीनों का उपयोग न केवल पेड़ों को लगाने के लिए किया जाता है, बल्कि उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए भी किया जाता है। यह तकनीक विशेष रूप से उन मामलों में उपयोगी है जहाँ पेड़ों को विकास के लिए या निर्माण कार्यों के कारण स्थानांतरित करने की आवश्यकता होती है। गुजरात में भी पेड़ों को शिफ्ट करने के लिए इन्हीं मशीनों का उपयोग किया जाता हैं। ये मशीनें पेड़ों को बिना नुकसान पहुंचाए, उनकी जड़ों सहित, एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में मदद करती हैं।
यह है पेड़ शिफ्टिंग की मशीनें
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