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राहुल गांधी मानहानि केस: सावरकर की रिहाई पर बोले सत्यकी सावरकर, “दया याचिका नहीं, जनदबाव था कारण”

July 02, 2026

पुणे । पुणे की एक विशेष अदालत में चल रहे कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के खिलाफ आपराधिक मानहानि मामले (Criminal defamation case) की सुनवाई के दौरान बुधवार को वीर सावरकर (Veer Savarkar) के प्रपौत्र सत्यकी सावरकर (Satyaki Savarkar) ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि विनायक दामोदर सावरकर की रिहाई ब्रिटिश सरकार ने उनकी दया याचिकाओं की वजह से नहीं, बल्कि बढ़ते जनदबाव के कारण की थी।

‘लगातार बढ़ रही थी सावरकर की लोकप्रियता’
सत्यकी सावरकर ने अदालत में कहा कि वर्ष 1923 में काकीनाडा कांग्रेस अधिवेशन में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष मोहम्मद अली जौहर की अध्यक्षता में सावरकर की रिहाई की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया था। उन्होंने दावा किया कि उस समय सावरकर की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही थी और उनकी रिहाई के लिए जनता का दबाव भी तेज हो गया था। इसी वजह से ब्रिटिश सरकार को उन्हें रिहा करना पड़ा।

इस सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की ओर से पेश अधिवक्ता मिलिंद पवार ने सावरकर की कथित दया याचिकाओं के कुछ हिस्से सत्यकी सावरकर के सामने रखे। इस पर उन्होंने कहा कि वह यह नहीं कह सकते कि याचिका में लिखी गई बातें सावरकर ने ही लिखी थीं। उन्होंने यह भी कहा कि वह यह नहीं कह सकते कि सावरकर ने रिहाई के बदले राजनीतिक या क्रांतिकारी गतिविधियों से दूर रहने का वादा किया था।


  • ‘भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की फांसी टल जाती’
    हालांकि उन्होंने दोहराया कि सावरकर की रिहाई का कारण दया याचिकाएं नहीं थीं। सत्यकी सावरकर ने अदालत में यह भी टिप्पणी की कि यदि कांग्रेस ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की फांसी से पहले भी इसी तरह का प्रस्ताव पारित किया होता, तो संभव है कि उनकी फांसी टल जाती।

    सत्यकी सावरकर ने 2023 में दायर किया था मानहानि का केस
    यह मामला 2023 में सत्यकी सावरकर द्वारा दायर मानहानि शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने मार्च 2023 में लंदन में दिए एक भाषण में वीर सावरकर के बारे में गलत और मानहानिकारक टिप्पणी की थी। शिकायत के अनुसार राहुल गांधी ने दावा किया था कि सावरकर ने अपनी एक किताब में एक मुस्लिम व्यक्ति की पिटाई करने और उससे आनंद मिलने की बात लिखी थी, जबकि सत्यकी सावरकर का कहना है कि सावरकर ने अपने किसी भी लेखन में ऐसा कोई उल्लेख नहीं किया है। मामला फिलहाल पुणे की विशेष सांसद-विधायक (एमपी/एमएलए) अदालत में विचाराधीन है।

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