
भाजपा में अंदरूनी खींचतान सामने आई, सांसद गुट लेना चाहता था श्रेय
इंदौर। मंत्री (Minister) कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) के कथित पत्र ( letter) को लेकर कल भोपाल (Bhopal) से लेकर दिल्ली (Delhi) तक राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी रही और मीडिया संस्थानों से लेकर राजनीतिक दलों में पत्र को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। इसी के पलटवार में कल सांसद शंकर लालवानी ने ताबड़तोड़ एक कार्यक्रम रख लिया, जिसमें मुख्यमंत्री को भी बुला डाला। हालांकि शाम होते-होते संगठन के दबाव के चलते कार्यक्रम को निरस्त कर दिया गया, लेकिन यह प्रयास भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी की पोल गया।
दरअसल सांसद शंकर लालवानी मुख्यमंत्री मोहन यादव को लेकर यह बताने का प्रयास करने वाले थे कि इंदौर सहित पूरे प्रदेश में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में किस तरह का विकास हुआ है और कितना फायदा इंदौर को मिल रहा है। जाहिर है यह पलटवार विजयवर्गीय के उस कथित पत्र के संबंध में था, जो कल एक मीडिया समूह ने जारी किया। हालांकि विजयवर्गीय ऐसा कोई पत्र लिखने से इनकार कर चुके हैं। इंदौर की विकास कार्यों के मामले में क्या वास्तविकता है यह यहां का नागरिक अच्छे से बता सकता है। अगर मुख्यमंत्री लालवानी के कार्यक्रम में आते और उनका सामना मीडिया से होता तो वे इस कथित पत्र को लेकर कुछ बयान नहीं दे पाते। वहीं एक ओर जीतू पटवारी अभी भी जमीन खरीद के आरोप लगाने के मामले में मुख्यमंत्री के पीछे पड़े हुए हैं, इसलिए जैसे ही भोपाल में खबर लगी कि मुख्यमंत्री का कार्यक्रम इंदौर में आयोजित करने की तैयारी चल रही है, संगठन तुरंत सक्रिय हो गया और लालवानी से संपर्क कर उन्हें कार्यक्रम निरस्त करने के लिए कहा गया। हालांकि तब तक सोशल मीडिया पर लालवानी ने इसके निमंत्रण पत्र बांट दिए थे और तैयारियां भी शुरू कर दी थीं। सूत्रों का कहना है कि संगठन की नाराजगी यह भी रही कि इतना बड़ा कार्यक्रम आयोजित कर लिया और स्थानीय संगठन के पदाधिकारियों को उसकी कोई खबर तक नहीं की गई और न ही उनसे विचार-विमर्श किया गया। इसी को लेकर लालवानी को बैकफुट पर आना पड़ा और शाम होते-होते उन्हें सोशल मीडिया पर ही कार्यक्रम स्थगित करने की सूचना देना पड़ी और कहा कि आगे की तारीख में यह कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कांग्रेस इस पर भाजपा में बढ़ती अंदरूनी गुटबाजी का इशारा कर रही है। अभी अधिकृत तौर पर कांग्रेस के किसी नेता का इस मामले में बयान तो सामने नहीं आया है, लेकिन कांग्रेस का कहना है कि शहर का एक नेता उपेक्षा का आरोप लगाता है और दूसरा नेता उस उपेक्षा को झूठा साबित करने तथा अपने नंबर बढ़वाने के लिए कार्यक्रम रखता है।