
इंदौर, कमलेश्वरसिंह सिसौदिया। मध्यप्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर में आने वाले वीआईपी और वीवीआईपी मेहमानों के पसंदीदा ठिकाने रेसीडेंसी कोठी को लेकर एक बड़ी खबर है। तकरीबन पौने दो सौ साल पुरानी इस ऐतिहासिक धरोहर को अब और अधिक आधुनिक और भव्य रूप देने की तैयारी कर ली गई है। लोक निर्माण विभाग द्वारा तैयार की गई विशेष कार्ययोजना के तहत कोठी परिसर के न्यू रेस्ट हाउस के 9 कमरों का पूरी तरह जीर्णोद्धार किया जाएगा। इन्हें फाइव स्टार होटलों की तर्ज पर अत्याधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस आलीशान सूइट में तब्दील किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक इसके लिए निविदा (टेंडर) जारी की जा चुकी है और आगामी तीन से चार महीनों के भीतर इस पूरे एरिया का नजारा बदला हुआ दिखाई देगा।
सन् 1854 में ब्रिटिशकाल के दौरान बनी रेसीडेंसी कोठी अपनी वास्तुकला और हरियाली के कारण आज भी किसी हिल स्टेशन जैसी नजर आती है। वर्तमान में यहां आगंतुक मेहमानों के रुकने के लिए चार अलग-अलग ब्लॉक में कुल 27 कमरों की व्यवस्था है। मुख्य कोठी बिल्डिंग- 9 शाही और भव्य कमरे, ओल्ड रेस्ट हाउस- 5 पारंपरिक कमरे, सर्किट हाउस- 4 वीआईपी कमरे, न्यू रेस्ट हाउस- 9 कमरे (जिनका कायाकल्प होना है)। परिसर के इन सभी हिस्सों में से न्यू रेस्ट हाउस के 9 कमरों की स्थिति सबसे ज्यादा जर्जर और खराब हो चुकी थी। इसकी बनावट व आंतरिक स्वरूप भी वीआईपी मेहमानों के स्तर के अनुकूल नहीं रह गया था। इसे देखते हुए पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री बद्रीप्रसाद साल्वे और प्रभारी एसडीओ आरके सविता ने इन कमरों को आधुनिक स्वरूप देने के लिए शासन को एक विस्तृत प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अब टेंडर की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि इंदौर आने वाले विशिष्ट अतिथियों को कमरों की कमी का सामना न करना पड़े।
अत्याधुनिक सुविधाओं और इंटीरियर पर फोकस
पीडब्ल्यूडी सूत्रों के मुताबिक न्यू रेस्ट हाउस के इन 9 कमरों के आंतरिक ढांचे (इंटीरियर) को पूरी तरह बदला जाएगा। इनमें आधुनिक एलईडी लाइटिंग, प्रीमियम फर्नीचर, सेंट्रलाइज्ड एसी, नए जमाने के वॉशरूम और हाईस्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं जोड़ी जाएंगी। हालांकि इस बदलाव के दौरान कोठी की मूल ऐतिहासिक पहचान और उसके बाहरी लुक से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
चार बगीचों में रंग-बिरंगे फूल
कोठी परिसर में स्थित चार बड़े और आकर्षक बगीचों (गार्डन) को संवारने की योजना पर कार्य शुरू कर दिया गया है। पहले चरण में उद्यानों में अनियंत्रित रूप से उगी घास की कटाई-छंटाई का काम शुरू किया गया है। इसके तुरंत बाद यहां देश-विदेश के कई प्रजातियों के रंग-बिरंगे और खुशबूदार पौधे रोपे जाएंगे। अधिकारियों ने बताया कि कोठी के ठीक सामने बने छोटे गार्डन में शाम के समय सैकड़ों प्रवासी व स्थानीय पक्षियों का जमावड़ा होता है। पक्षियों का यह मधुर कलरव यहां ठहरने वाले मेहमानों को मानसिक शांति और सुकून देता है। इस प्राकृतिक सौंदर्य को और अधिक बढ़ाने के लिए लैंडस्कैपिंग एक्सपट्र्स की मदद ली जा रही है।
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