
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (West Asia) के रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सुरक्षित नौवहन बहाल करने के लिए फ्रांस ने बड़ा कदम उठाया है। फ्रांस (France) के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (President Emmanuel Macron) ने घोषणा की है कि उनके देश ने क्षेत्र में बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करने वाले दो माइनहंटर युद्धपोत तैनात किए हैं। इसके साथ ही दो फ्रिगेट और एक मैरीटाइम पेट्रोल विमान भी मिशन में शामिल किए गए हैं।
राष्ट्रपति मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि इन सैन्य संसाधनों का उद्देश्य सहयोगी देशों के साथ मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित समुद्री आवाजाही को पूरी तरह बहाल करना और नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
La France a déployé au Moyen-Orient des moyens de déminage, avec notamment deux chasseurs de mines. Accompagnés de deux frégates et d’un avion de patrouille maritime, ces moyens sont prêts à contribuer, avec nos partenaires, à la pleine reprise de la navigation et à garantir la… pic.twitter.com/4RyZCwx3h6
— Emmanuel Macron (@EmmanuelMacron) July 3, 2026
मैक्रों के अनुसार, 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन ने क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका कहना है कि इस समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता को नई मजबूती मिली है।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने बताया कि ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल सईद के साथ हुई बातचीत के बाद फ्रांस ने अपनी सैन्य तैनाती में बदलाव किया है। इसी के तहत फ्रांस का विमानवाहक पोत शार्ल द गॉल अपने होम पोर्ट टूलों लौट रहा है, जबकि माइन काउंटरमेजर्स जहाज और उनके सुरक्षा बल क्षेत्र में तैनात रहेंगे तथा आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रहेंगे।
इस बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और राष्ट्रपति मैक्रों ने शुक्रवार को जारी संयुक्त बयान में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। ऐसे में यहां सभी देशों के जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा प्राथमिकता है।
संयुक्त बयान में यह भी बताया गया कि ओमान ने अपने समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत करने के लिए ब्रिटेन और फ्रांस के साथ मिलकर काम करने पर सहमति जताई है। दोनों देशों ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने, सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करने और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
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