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अयोध्या: चंपत राय-अनिल मिश्रा के इनकार पर बढ़ा सस्पेंस, मंदिर जांच में अब CA की एंट्री

July 03, 2026

अयोध्या . राम मंदिर (Ram Mandir) चढ़ावा चोरी (Theft of religious offerings) की जांच तेज होने के साथ ही नए दिन के साथ नए सवाल भी सामने आ रहे हैं. एक ओर विशेष जांच दल (SIT) वित्तीय दस्तावेजों और ट्रस्ट के ऑडिट रिकॉर्ड की गहराई से जांच में जुटा है, तो दूसरी ओर पुलिस भी अलग से पड़ताल कर रही है.

सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी गुरुवार को एक बार फिर अयोध्या पहुंची और मंदिर परिसर के भीतर लंबी पूछताछ की. इस दौरान ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारी चंपत राय (Champat Rai), डॉ. अनिल मिश्रा (Anil Mishra) और गोपाल राव से उनकी भूमिका, चढ़ावे की गणना, सुरक्षा व्यवस्था, दान राशि जमा करने की प्रक्रिया और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को लेकर कई सवाल पूछे गए. हालांकि इस पूछताछ की आधिकारिक पुष्टि अभी तक एसआईटी या श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से नहीं की गई है.


  • पूछताछ में भूमिका से इनकार
    सूत्रों का दावा है कि पूछताछ के दौरान चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव ने चढ़ावे की गिनती और पैसे प्रबंधन में अपनी प्रत्यक्ष भूमिका से इनकार किया. बताया जा रहा है कि तीनों ने कई मामलों में जिम्मेदारी अन्य कर्मचारियों की ओर संकेत करते हुए टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव का नाम लिया.

    चार्टर्ड अकाउंटेंट की भी ली जा रही मदद
    बताया जा रहा है कि वित्तीय दस्तावेजों की जटिलता को देखते हुए पुलिस चार्टर्ड अकाउंटेंट की भी सहायता ले रही है. विशेषज्ञ ऑडिट रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन और अन्य वित्तीय दस्तावेजों का विश्लेषण कर रहे हैं ताकि यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई हो तो उसे दस्तावेजी रूप से स्थापित किया जा सके.

    चार घंटे नहीं, करीब आठ घंटे तक चली जांच
    सूत्रों के अनुसार, जांच दोपहर करीब 1:40 बजे शुरू हुई और रात 8:30 बजे तक चली. इस दौरान एसआईटी ने मंदिर परिसर में मौजूद व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया. जांच दल ने केवल दस्तावेजों तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि यह भी समझने की कोशिश की कि दान पेटियों से धन निकालने, उसकी गणना करने और बैंक में जमा कराने तक पूरी प्रक्रिया कैसे संचालित होती है. बताया जा रहा है कि आईपीएस अधिकारी किरण एस की मौजूदगी में टीम ने कई पहलुओं की समीक्षा की और संबंधित लोगों से विस्तार से जानकारी ली.

    ऑडिट रिपोर्ट बनी जांच का सबसे बड़ा आधार
    इस पूरे मामले में अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ट्रस्ट के पिछले पांच वर्षों के ऑडिट रिकॉर्ड को माना जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने ट्रस्ट से सभी ऑडिट रिपोर्ट, वित्तीय दस्तावेज और संबंधित रिकॉर्ड मांगे हैं. जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दान राशि के संग्रह, गणना, बैंक में जमा करने और लेखांकन की प्रक्रिया में कहीं कोई अनियमितता तो नहीं हुई. हालांकि, सूत्रों का कहना है कि कुछ जरूरी विवरण अभी तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं. जांच अधिकारियों का मानना है कि पूरा रिकॉर्ड मिलने के बाद ही किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा.

    पुलिस की अलग जांच, सीसीटीवी और दान पात्रों की पड़ताल
    एसआईटी की कार्रवाई के साथ-साथ पुलिस भी अपनी विवेचना आगे बढ़ा रही है. पुलिस टीम मंदिर पहुंची और दान पात्रों का निरीक्षण किया. अधिकारियों ने पूरी प्रक्रिया को समझा कि किस प्रकार दान पेटियों को खोला जाता है, राशि निकाली जाती है, उसकी गणना होती है और फिर बैंक तक पहुंचाई जाती है. सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने इस दौरान कई सीसीटीवी फुटेज भी अपने कब्जे में लिए हैं, जिनका तकनीकी विश्लेषण कराया जा रहा है. जांच अधिकारी यह भी देख रहे हैं कि प्रक्रिया के दौरान किन-किन लोगों की जिम्मेदारी तय थी और किस स्तर पर निगरानी की व्यवस्था मौजूद थी.

    प्रतापगढ़ तक पहुंची जांच
    जांच का दायरा अब अयोध्या से बाहर भी फैल चुका है. सूत्रों के अनुसार, पुलिस की एक टीम आरोपी अविनाश शुक्ला के प्रतापगढ़ स्थित गांव पहुंची, जहां उसके परिजनों से पूछताछ की गई. इस दौरान कुछ दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए गए. पुलिस इन दस्तावेजों का मिलान अन्य रिकॉर्ड से कर रही है. हालांकि, जांच एजेंसियां इन जवाबों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं बताई जा रही हैं. सूत्रों के अनुसार, कई सवालों पर मिले जवाबों में स्पष्टता नहीं थी और कुछ बिंदुओं पर विरोधाभास भी सामने आया, जिनकी आगे जांच की जा रही है.

    बैंक कर्मचारियों तक पहुंची जांच
    सूत्रों के अनुसार, पुलिस और एसआईटी अब केवल मंदिर कर्मचारियों तक सीमित नहीं हैं. जांच बैंक कर्मचारियों तक भी पहुंच चुकी है. यह पता लगाया जा रहा है कि चढ़ावा गणना के लिए किन कर्मचारियों की तैनाती हुई, उनका चयन किस आधार पर हुआ और क्या किसी स्तर पर सिफारिश या प्रभाव का इस्तेमाल किया गया. बताया जा रहा है कि कुछ बैंक कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है. हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. इस मामले में अब ट्रस्ट से जुड़े लोगों पर दो स्तर पर जांच चल रही है. एक तरफ एसआईटी प्रशासनिक और वित्तीय पहलुओं की पड़ताल कर रही है, वहीं दूसरी ओर पुलिस आपराधिक जांच को आगे बढ़ा रही है. ऐसे में आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ सकता है.

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