
नई दिल्ली: भारत, ब्रिटेन और अमेरिका के कानूनी विशेषज्ञों ने गौतम अडानी के खिलाफ अमेरिका में चल रहे आपराधिक मामले को वापस लेने के फैसले का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) ने अदालत में जो जवाब दिया है, वह साफ बताता है कि इस मामले में मुकदमा चलाने की जरूरत नहीं है. ये बयान तब सामने आए जब अमेरिकी न्याय विभाग ने अदालत में एक लंबी रिपोर्ट दाखिल की.
इसमें विभाग ने कहा कि इस मामले में कोई संगठित अपराधी गिरोह शामिल नहीं था. अमेरिकी कंपनियों को कोई नुकसान नहीं हुआ. भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ा. भारत में इसकी जांच पहले ही हो चुकी है. विभाग ने ये भी सवाल किया कि आखिर इस मुकदमे को शुरू ही क्यों किया गया था?
सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे ने कहा कि अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) की रिपोर्ट से साफ पता चलता है कि गौतम अडानी के मामले में वो बातें नहीं थीं, जिनकी वजह से आमतौर पर अमेरिका में मुकदमा चलाया जाता है. उन्होंने कहा किसइस मामले में न तो राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई असर था, न अमेरिकी कंपनियों से कोई संबंध था और न ही कोई संगठित अपराध था.
कई वकीलों ने सबूतों को अच्छे से देखा था. बचाव पक्ष (अडानी के वकील) की बात सुने बिना ही 2024 के अंत में यह केस दर्ज कर दिया गया था. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली बाइडेन सरकार भारत के खिलाफ नकारात्मक प्रचार चला रही थी. कुछ अमेरिकी सीनेटर लगातार भारत के खिलाफ बोल रहे थे और भारत पर दबाव बना रहे थे. साल्वे ने कहा कि यह पूरा मामला सिर्फ “नाम खराब करने और शर्मिंदा करने” की कोशिश थी. इसमें मुकदमा जीतने की कोई असली उम्मीद नहीं थी. उम्मीद है कि अमेरिकी कोर्ट जल्द ही इस मामले को बंद कर देगा.
वकील विजय अग्रवाल ने कहा कि अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) की अपनी रिपोर्ट से साफ है कि गौतम अडानी के मामले में अभियोजन पक्ष (DoJ) के पास ठोस सबूत नहीं थे. उन्होंने कहा कि शुरू से ही इस मामले में कोई मजबूत केस नहीं था. सबूत बहुत कमजोर थे. सबसे बड़ी बात, कोई साबित होने वाला नुकसान भी नहीं दिखता. इसलिए मुकदमा चलाने का कोई आधार ही नहीं बनता. विजय अग्रवाल ने आगे कहा कि अदालतें खुद से मुकदमा नहीं चलातीं। वे सिर्फ़ उन मामलों पर फैसला करती हैं जो उनके सामने लाए जाते हैं.
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