नई दिल्ली । सनातन धर्म के प्रमुख ग्रंथों में शामिल गरुड़ पुराण (Garuda Purana) में जीवन, मृत्यु (Death), कर्म (Karma) और आत्मा (Soul) की यात्रा का विस्तृत वर्णन मिलता है। इस ग्रंथ में यह भी बताया गया है कि मनुष्य के जीवनभर के कर्म उसके अंतिम समय और मृत्यु के बाद की यात्रा को प्रभावित करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार कुछ ऐसे पुण्यवान (Virtuous) लोग भी होते हैं, जिनके पास मृत्यु के समय यमराज के दूत नहीं पहुंचते।
गरुड़ पुराण के अनुसार पहला स्थान उन लोगों का है जो पूरे जीवन ईश्वर की भक्ति, नाम-स्मरण और धर्म पालन में लगे रहते हैं। मान्यता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान का स्मरण करता है और श्रद्धा के साथ आध्यात्मिक जीवन व्यतीत करता है, उसके अंतिम समय में भय और कष्ट का अनुभव नहीं होता। ऐसे भक्तों को लेने के लिए विष्णुदूतों के आने का उल्लेख मिलता है, जो उनकी आत्मा को सम्मानपूर्वक दिव्य लोक की ओर ले जाते हैं।
दूसरे प्रकार के लोगों में वे शामिल हैं जो निस्वार्थ भाव से समाज और जरूरतमंदों की सेवा करते हैं। भूखों को भोजन कराना, असहाय लोगों की सहायता करना, बीमारों की सेवा करना और बिना किसी स्वार्थ के परोपकार करना धर्म का श्रेष्ठ कार्य माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार ऐसे व्यक्तियों के पुण्य कर्म उन्हें विशेष स्थान दिलाते हैं और उनके प्रति दिव्य सम्मान प्रकट किया जाता है।
तीसरी श्रेणी उन लोगों की बताई गई है जो जीवनभर सत्य, ईमानदारी और धर्म के मार्ग पर चलते हैं। जो व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी असत्य, छल और अन्याय का सहारा नहीं लेते, अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करते हैं तथा माता-पिता और समाज के प्रति सम्मान का भाव रखते हैं, उन्हें धार्मिक दृष्टि से श्रेष्ठ माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इन लोगों को मृत्यु का भय कम सताता है और उन्हें उत्तम गति प्राप्त होती है।
गरुड़ पुराण में यह भी कहा गया है कि मनुष्य के अच्छे और बुरे कर्म ही उसके जीवन और मृत्यु के बाद की स्थिति का निर्धारण करते हैं। इसलिए व्यक्ति को लोभ, क्रोध, छल और हिंसा जैसे अवगुणों से दूर रहकर सदाचार, करुणा और धर्म का पालन करने का प्रयास करना चाहिए। यही गुण आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मृत्यु जीवन का अटल सत्य है, लेकिन उससे जुड़ा अनुभव व्यक्ति के कर्मों पर निर्भर माना गया है। इसलिए शास्त्र मनुष्य को भय के बजाय सत्कर्म, भक्ति और सेवा का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देते हैं। इन शिक्षाओं का उद्देश्य लोगों को नैतिक जीवन, सामाजिक जिम्मेदारी और आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करना है।
यह उल्लेखनीय है कि गरुड़ पुराण में वर्णित ये सभी बातें धार्मिक आस्था और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें श्रद्धा और विश्वास के संदर्भ में देखा जाता है तथा इनका उद्देश्य व्यक्ति को सदाचार, परोपकार और धर्ममय जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है।
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