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MP वक्फ बोर्ड पुनर्गठन पर सियासत तेज, सरकार और मुस्लिम संगठन आमने-सामने

July 06, 2026

भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh) ने नए वक्फ कानून (Waqf Law) के तहत राज्य वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन कर दिया है. इसके साथ ही मध्य प्रदेश नए वक्फ बोर्ड का गठन करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है. बोर्ड में पहली बार दो हिंदू सदस्य (Hindu Member) भी बनाए गए हैं. वहीं अब बोर्ड के पुनर्गठन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. बोर्ड में पहली बार दो हिंदू सदस्यों को शामिल किए जाने के फैसले का बोर्ड अध्यक्ष सनवर पटेल और मंत्री विश्वास सारंग ने स्वागत किया है. इनका कहना है कि यह फैसला बेहतर प्रबंधन, पारदर्शिता और वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा के उद्देश्य से लिया गया है. तो वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने सरकार के इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है.

मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सनवर पटेल ने कहा कि बोर्ड का पुनर्गठन एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम है. उन्होंने कहा कि इस बार बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों के साथ दो महिलाओं को भी शामिल किया गया है. उन्होंने कहा कि कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों का क्या काम है. उन्होंने कहा कि कुथ लोग मंदिरों और गुरुद्वारा समितियों में मुस्लिम सदस्यों की बात कर रहे हैं.


  • सनवर पटेल ने कहा कि वक्फ बोर्ड और मस्जिद अलग-अलग संस्थाएं हैं. उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड एक प्रशासनिक और प्रबंधन से जुड़ा निकाय है, जहां ईमानदार और सक्षम लोगों की जरूरत होती है. उन्होंने कहा कि बोर्ड का पुनर्गठन इसलिए किया गया है ताकि वक्फ संपत्तियों में किसी तरह का भ्रष्टाचार न हो और जमीनों पर अवैध कब्जों को रोका जा सके.

    वहीं मंत्री विश्वास सारंग ने भी वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन को सराहनीय निर्णय बताया. उन्होंने कहा कि पहली बार बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों को शामिल किया गया है, जो बेहतर प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने कहा कि जो लोग मंदिर या गुरुद्वारा समितियों में मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने जैसी तुलना कर रहे हैं, वो दोनों व्यवस्थाओं के अंतर को नहीं समझ रहे हैं. उनके अनुसार वक्फ बोर्ड कोई मस्जिद नहीं, बल्कि एक वैधानिक बोर्ड है जिसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का प्रभावी और पारदर्शी प्रबंधन सुनिश्चित करना है.

    इधर नया कानून बनने के बाद बनी वक्फ की नई कमेटी में गैर मुसलमानों को सदस्य बनाने को लेकर अब विवाद छिड़ गया है. ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने इसे लेकर राजधानी भोपाल में विरोध प्रदर्शन किया. कमेटी ने बुधवारा चौराहे पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. मुस्लिम संगठनों की मांग है कि इस कमेटी को तुरंत भंग किया जाए क्योंकि वक्फ बोर्ड उनकी आस्था से जुड़ा हुआ मामला है और इसमें हिंदुओं की एंट्री गलत है.

    मुस्लिम संगठनों का आरोप
    मुस्लिम संगठनों का कहना है कि आज सरकार बोर्ड पर कब्जा करने की कोशिश हो रही है , कल मस्जिदों पर और मदरसों पर भी कब्जे होने लगेंगे.संगठनों के अनुसार सरकार को सिर्फ प्रॉपर्टी नजर आ रही है और लालच की वजह से वह इस पर कब्जा करना चाहती है. संगठनों का कहना है कि यह कोई सरकारी संस्था नहीं बल्कि ऑटोनॉमस बॉडी है.

    मुस्लिम संगठनों की यह मांग है कि अगर वक्फ बोर्ड में हिंदू शामिल हो रहे हैं तो अयोध्या, मथुरा, महाकाल इन सारे मंदिरों के कमेटी में मुसलमानों को भी शामिल किया जाए. संगठनों का कहना है कि वह इसके खिलाफ राष्ट्रपति के पास जाएंगे और जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे. इसके अलावा मुस्लिम संगठनों ने मुसलमानों से अपील की है कि वो सड़कों पर उतरकर इसका विरोध करें.

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