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पश्चिम एशिया में फिर बढ़ा तनाव… भारत के 9 जहाज, 198 नाविक अब भी हॉर्मुज में मौजूद

July 08, 2026

तेहरान। पश्चिम एशिया (West Asia) में 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद समुद्री व्यापार और जहाजों (Maritime Trade and Ships) की आवाजाही पर खास नजर रखी जा रही है। इस बीच एक अहम जानकारी सामने आई है कि भारत के लिए माल लेकर आ रहे भारतीय और विदेशी झंडे वाले 50 जहाज विवाद शुरू होने के बाद से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को पार कर चुके हैं। वहीं, फिलहाल 198 भारतीय नाविकों के साथ 9 भारतीय जहाज अभी भी फारस की खाड़ी क्षेत्र यानी होर्मुज के पश्चिम में मौजूद हैं।

‘जहाज फंसे नहीं हैं, व्यापारिक गतिविधियों में हैं’
मौजूदा स्थिति को लेकर शिपिंग मंत्रालय के एक अधिकारी ने स्थिति स्पष्ट की है। अधिकारी ने कहा, “ये जहाज वहां फंसे नहीं हैं, बल्कि वर्तमान में उस क्षेत्र में व्यापार कर रहे हैं या अपने कार्यों में लगे हुए हैं।”

हालांकि, इस बात को लेकर अभी तक कोई नया अपडेट नहीं है कि क्या भारत से जाने वाले जहाज नया कंसाइनमेंट (माल) लेने के लिए होर्मुज के रास्ते पश्चिम एशिया की ओर जाने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, शिपिंग इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों का मानना है कि शिपिंग कंपनियों को इस इलाके में अपने जहाजों को फिर से भेजने की योजना बनाने में थोड़ा और वक्त लग सकता है।


  • होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की डिटेल
    – अधिकारियों के मुताबिक, तनाव के बीच जो जहाज सुरक्षित रूप से इस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरे हैं, उनके आंकड़े इस प्रकार हैं:
    – सुरक्षित निकलने वाले कुल 50 जहाजों में 18 भारतीय झंडे वाले पोत हैं, जबकि शेष 32 विदेशी झंडे वाले जहाज हैं। इनमें सबसे अधिक 19 जहाज बल्क कैरियर थे।
    – 14 जहाजों ने एलपीजी का परिवहन किया, जबकि 12 जहाज क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) के टैंकर थे। बाकी बचे जहाजों में दो एलएनजी कैरियर और एक कंटेनर पोत शामिल है।

    पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तीन कॉमर्शियल जहाजों पर हुए हमले के बाद अमेरिका ने मंगलवार को ईरान पर कई “शक्तिशाली” सैन्य हमले किए हैं। इसके साथ ही, अमेरिका ने सख्त कदम उठाते हुए ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचने की छूट देने वाले लाइसेंस को भी रद्द कर दिया है। इससे साफ है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जंग एक बार फिर लौट आई है।

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एक्स पर इन हमलों की पुष्टि की है। अमेरिका ने इसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान के ‘अकारण और खतरनाक’ हमलों का सीधा जवाब बताया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इन हवाई हमलों में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी प्रणाली (कोस्टल सर्विलांस सिस्टम), सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल साइटों, एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों, ड्रोन लॉन्च साइटों और बंदरगाह सुविधाओं को निशाना बनाया गया। अमेरिका ने ईरान की इस कार्रवाई को पिछले महीने दोनों देशों के बीच हुए सीजफायर समझौते का “स्पष्ट उल्लंघन” करार दिया है, जिससे इस शांति समझौते के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    अमेरिकी हमलों के तुरंत बाद ईरानी सरकारी मीडिया ने दक्षिणी ईरान के कई हिस्सों में जोरदार विस्फोटों की सूचना दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिरीक बंदरगाह शहर, कश्म द्वीप और बंदर अब्बास के इलाकों में कई धमाके सुने गए। सिरीक के ताहेरोउई पियर इलाके में प्रोजेक्टाइल गिरने की भी खबर है। हालांकि, अभी तक किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान या हताहतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    कतर और सऊदी अरब ने की कड़ी निंदा
    होर्मुज में जिन तीन जहाजों को निशाना बनाया गया, उनमें कतर का एलएनजी टैंकर ‘अल रकीयात’ और सऊदी अरब के झंडे वाला टैंकर ‘वेद्यान’ शामिल थे। कतर के जहाज के इंजन रूम के पास ड्रोन से हमला किया गया था।

    कतर के विदेश मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का “गंभीर और स्पष्ट उल्लंघन” बताते हुए ईरान को इस आक्रामक कृत्य के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया है। कतर ने अपना विरोध दर्ज कराने के लिए ईरानी उप-राजदूत को भी तलब किया। सऊदी अरब ने हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय नेविगेशन और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।

    ईरान का पलटवार, दी चेतावनी
    दूसरी ओर, ईरान ने इन हमलों के लिए अमेरिका को ही जिम्मेदार ठहराया है। ईरान का दावा है कि अमेरिका द्वारा जलडमरूमध्य के जरिए नए मार्ग खोलने की कोशिश उस ‘समझौता ज्ञापन’ (MoU) का उल्लंघन है जिस पर दोनों पक्षों ने हस्ताक्षर किए थे। ईरानी विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि अमेरिका द्वारा समझौते का उल्लंघन किए जाने के गंभीर परिणाम होंगे और ईरान अपने राष्ट्रीय हितों व सुरक्षा की रक्षा के लिए हर आवश्यक और निर्णायक कदम उठाएगा। साथ ही, ईरान का यह भी कहना है कि जलडमरूमध्य में सुरक्षा प्रदान करने के लिए उसे वहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने का अधिकार है, जिसे ओमान और पश्चिमी देशों ने खारिज कर दिया है।

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