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विधानसभा चुनावों में BJP की नई रणनीति, राज्यों में CM फेस घोषित किए बिना मैदान में उतरने की तैयारी

July 11, 2026

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) और गुजरात (Gujarat) समेत अगले साल सात राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों (Assembly elections) को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी रणनीति पर मंथन शुरू कर दिया है। पार्टी आगामी चुनावों में मुख्यमंत्री पद के चेहरे की पहले से घोषणा करने के बजाय सामूहिक नेतृत्व और मौजूदा संगठनात्मक ढांचे के साथ चुनाव लड़ने की योजना बना रही है।

सूत्रों के मुताबिक, भाजपा का मानना है कि पिछले कुछ चुनावों के अनुभवों को देखते हुए यह रणनीति पार्टी के लिए अधिक प्रभावी साबित हुई है। हालांकि, जिन राज्यों में भाजपा की सरकार है, वहां मौजूदा मुख्यमंत्री को चुनाव अभियान में प्रमुख भूमिका दी जा सकती है, लेकिन उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा चुनाव से पहले नहीं की जाएगी।

CM चेहरे की घोषणा से बचने की रणनीति
भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के नाम का ऐलान करने से कई बार सत्ता विरोधी माहौल (एंटी इनकंबेंसी) बढ़ सकता है। साथ ही पार्टी के भीतर भी अलग-अलग धड़े सक्रिय होने की संभावना रहती है।


  • सूत्रों का कहना है कि पार्टी में एक बड़े वर्ग की राय है कि जिन राज्यों में भाजपा की सरकार है, वहां चुनाव मौजूदा नेतृत्व के साथ लड़ा जा सकता है, लेकिन मुख्यमंत्री के नाम को पहले से तय बताने से बचना बेहतर होगा। इससे पार्टी को चुनाव में पूरी ताकत के साथ उतरने का मौका मिलता है और विपक्ष को भी मुद्दा बनाने का अवसर कम मिलता है। वहीं, जिन राज्यों में भाजपा सत्ता में नहीं है, वहां भी पार्टी सामूहिक नेतृत्व के आधार पर चुनावी मैदान में उतरने की रणनीति पर आगे बढ़ सकती है।

    अगले साल सात राज्यों में होंगे विधानसभा चुनाव
    अगले साल देश के सात राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इनमें पांच राज्यों में फरवरी-मार्च के दौरान और दो राज्यों में दिसंबर में चुनाव होने हैं। भाजपा वर्तमान में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा और गुजरात में सत्ता में है, जबकि पंजाब और हिमाचल प्रदेश में उसकी सरकार नहीं है। पार्टी की कोशिश अपनी सरकार वाले राज्यों में सत्ता बरकरार रखने के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी बेहतर प्रदर्शन करने की है। भाजपा नेतृत्व को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री चेहरे की घोषणा किए बिना सामूहिक नेतृत्व के साथ चुनाव लड़ने की रणनीति आगामी चुनावों में पार्टी के लिए अधिक फायदेमंद साबित हो सकती है।

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