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मिलावटी शराब बिकने का मामला चर्चा में, उज्जैन का खाद्य विभाग नहीं लेता शराब के सेम्पल

July 13, 2026

उज्जैन। इंदौर-उज्जैन तथा प्रदेश के अन्य जिलों में ओल्डमोंक रम के सेम्पल फेल हुए थे यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। खाने-पीने की वस्तुओं के हजारों सैंपल हर साल लेने वाला विभाग शराब की नियमित जांच को लगभग नजरअंदाज करता रहा। अधिकारी जिम्मेदारी से मुंह मोड़े सोते रहे। नतीजा यह हुआ कि वर्षों तक बाजार में ऐसी शराब बिकती रही, जिसमें लेबलिंग और गुणवत्ता संबंधी गंभीर गड़बडिय़ां होने के बावजूद उन पर समय रहते कार्रवाई नहीं हो सकी।


  • उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2025 में महाराष्ट्र के खपोली में खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा देश में सर्वाधिक बिकने वाली ओल्ड मोंक रम के सैंपल लिए थे। इसमें से तीन सैंपल जांच में फेल हो गए। इसके बाद एफएसएसएआई ने इस फैक्ट्री में निर्मित फेल हुए सैंपलों की बिक्री पर रोक लगा दी, जिसके बाद महाराष्ट्र के कई क्षेत्रों में ओल्ड मोंक मिलना ही बंद हो गई। जांच में पाया गया कि उक्त ब्रांड ओरिजिनल रम के बजाए रम का फ्लेवर मिलाकर शराब तैयार कर रहा था। साथ ही एजिंग से जुड़े दावे भी गलत पाए गए। इस कार्रवाई के खिलाफ कंपनी कोर्ट पहुंची है और मामला अभी विचाराधीन है। इस बीच एफएस एसएआई ने देश में अलग-अलग शराब की जांच का अभियान भी शुरू कर दिया, जिसके तहत उज्जैन में भी दो साल में एक क सैंपल लेकर जांच के लिए मुंबई स्थित लैब में भेजा गया। खाद्य अधिकारी का कहना है कि हमें यदि कोई शिकायत करता है तो हम जाँच करने जाते हैं। बाकी आबकारी का अमला अपने हिसाब से समय-समय पर शराब की चैकिंग करता है। आम लोगों की धारणा रहती है कि शराब से जुड़ा हर काम आबकारी विभाग देखता है, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग है। शराब के लाइसेंस, बिक्री और राजस्व संबंधी व्यवस्थाएं भले आबकारी विभाग के अधीन हों, लेकिन शराब की गुणवत्ता, मानक, लेबलिंग और उपभोक्ता को सही जानकारी उपलब्ध कराना खाद्य सुरक्षा कानून के तहत खाद्य विभाग की जिम्मेदारी है। यही कारण है कि हाल के मामलों में भी जांच खाद्य सुरक्षा कानून के तहत की गई और लेबलिंग में गड़बडिय़ां सामने आने के बाद कार्रवाई शुरू हुई। जबकि जानकारी के अभाव में अक्सर शराब से जुड़ी कोई भी शिकायत होने पर ज्यादातर लोग आबकारी विभाग को शिकायत करते हैं और विभाग भी अपने अधिकार क्षेत्र तक कार्रवाई कर पाता है। श्री शर्मा ने कहा कि शराब के नमूने लेना सामान्य खाद्य पदार्थों की तुलना में कहीं अधिक संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण काम है।
    ऐसे मामलों में कई तरह के दबाव का सामना करना पड़ता है। यही वजह है कि अधिकारी अक्सर शिकायत मिलने पर ही कार्रवाई करते हैं। अधिकारियों का यह भी कहना है कि मुख्यालय और एफएसएसएआई की ओर से खाद्य पदार्थों के सैंपलिंग अभियान को लेकर लगातार निर्देश जारी होते रहते हैं, लेकिन शराब के लिए इस तरह के नियमित विशेष अभियान या लक्ष्य निर्धारित नहीं किए जाते। इसके चलते शराब की सैंपलिंग प्राथमिकता में नहीं आ पाती।

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