
जबलपुर। जबलपुर संभाग में इस साल मानसून की चाल बेहद सुस्त बनी हुई है। आलम यह है कि पिछले साल की तुलना में अब तक 65 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में अभी तक केवल 181.4 मिमी बारिश ही हुई है, जबकि पिछले वर्ष इस अवधि तक 522.4 मिमी पानी गिर चुका था। मानसून में आई इस 10 दिन की देरी और अलनीनो के प्रभाव के चलते कुल बारिश का आंकड़ा 68 प्रतिशत पीछे चल रहा है। इस स्थिति ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि धान की बुवाई और खरीफ की फसलें पूरी तरह से प्रभावित हो रही हैं। रानी अवंती बाई लोधी सागर परियोजना अर्थात बरगी बांध का जलस्तर घटने से नहरों से पानी की आपूर्ति भी बाधित है, जिससे सिंचाई का संकट गहरा गया है।
खेतों में फसल सूखने से किसान परेशान
मानसून की बेरुखी का सबसे सीधा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ रहा है। किसानों कहना है कि पर्याप्त बारिश न होने से धान की फसलें प्रभावित हो रही हैं और नहरों से सिंचाई का पानी भी नहीं मिल पा रहा है। ऐसी विकट परिस्थिति में किसान अब कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों की ओर रुख करने को मजबूर हैं। खेतों में नमी कम होने से बुवाई का काम भी रुक गया है। प्रशासन को भी स्थिति पर नजर रखनी होगी क्योंकि अगर अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो रबी के साथ-साथ खरीफ की फसल के उत्पादन पर भी बड़ा प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
मौसम विभाग का क्या है अनुमान
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह से मानसून के कमजोर पडऩे से बारिश में ब्रेक लगा था, लेकिन अब राहत की खबर है। वर्तमान में मानसून द्रोणिका के उत्तर की ओर खिसकने से स्थिति में व्यवधान था, जो अब सुधर रहा है। विभाग के संकेत हैं कि 15 से 16 जुलाई से जबलपुर सहित संभाग के जिलों में बारिश का दौर फिर से शुरू हो सकता है। मौसम को प्रभावित करने वाली प्रणालियां अब सक्रिय हो रही हैं, जिससे अगले 2 से 3 दिनों में तेज हवाओं के साथ कहीं-कहीं बौछारें पडऩे की संभावना बनी हुई है। आने वाले समय में बारिश की सक्रियता बढऩे से किसानों को राहत मिलने के पूरे आसार हैं।
सिंचाई के लिए पानी का गहरा संकट
बरगी बांध से पानी न छोड़े जाने के कारण दांई और बांई तट नहरें सूखी पड़ी हैं। इससे उन क्षेत्रों में धान की रोपाई और बढ़वार पर बुरा असर पड़ा है जहां किसान पूरी तरह से नहर के पानी पर आश्रित हैं। पिछले 10 वर्षों के जुलाई के आंकड़ों को देखें तो इस साल 5 जुलाई तक मात्र 17.6 मिमी बारिश हुई है, जो पिछले किसी भी वर्ष की तुलना में काफी कम है। जलस्तर घटने से सिंचाई विभाग के लिए भी चुनौतियां बढ़ गई हैं। किसान अब आसमान की ओर निहार रहे हैं ताकि पानी की कमी से उनकी मेहनत व्यर्थ न जाए और उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना न करना पड़े।
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