
इंदौर। अभी इंदौर सहित प्रदेशभर में ग्रामीण आबादी को मालिकाना हक देने के लिए स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन और पंजीयन योजना को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी, जिसमें साढ़े 3 हजार करोड़ रुपए से अधिक की स्टाम्प ड्यूटी माफ की गई और ये रजिस्ट्रियां पूरी तरह से नि:शुल्क कराई जाएंगी। यहां तक कि पंचायत और अन्य उपकर की डेढ़ फीसदी राशि भी शासन ने माफ कर दी। वित्त विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए और इसके पूर्व ग्रामीण विकास विभाग पंचायत उपकरण छूट दे रहा है। दूसरी तरफ उपपंजीयकों की तरह तहसीलदारों को भी रजिस्ट्री करने के अधिकार इस योजना के तहत दे दिए हैं। वाणिज्यिक कर विभाग ने इस संबंध में भी आदेश जारी कर दिए। पूरे प्रदेश में 48 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रियां इस योजना के तहत होना हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कैबिनेट बैठक के बाद स्वामित्व योजना की जानकारी देते हुए कहा कि इससे 48 लाख से अधिक परिवारों को उनकी सम्पत्ति का मालिकाना हक मिल जाएगा। 2 जून को हुई कैबिनेट बैठक में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन और पंजीयन योजना को मंजूरी देते हुए स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क से माफी दी गई। इस संबंध में अलग-अलग अध्यादेश के नोटिफिकेशन भी जारी करवा दिए। इसके साथ ही तहसीलदार, नायब तहसीलदार को भी उपपंजीयकों की तरह रजिस्ट्रियां करने के अधिकार दिए गए और इस संबंध में भी पंजीयन और मुद्रांक विभाग ने आदेश जारी किए हैं।
जिस आबादी भूमि की रजिस्ट्री इस योजना के तहत होना है उस क्षेत्र के उपपंजीयक कार्यालय में तहसीलदार भी ये रजिस्ट्रियां कर सकेंगे, क्योंकि लाखों की संख्या में रजिस्ट्रियां होना हैं, जिसके चलते पंजीयन विभाग का अमला तो इसमें लगेगा ही, वहीं इंदौर सहित प्रदेशभर में राजस्व न्यायालय का काम करने वाले तहसीलदार भी ये रजिस्ट्रियां कर सकेंगे। इस योजना से जहां जमीन का स्वामित्व हासिल होगा, वहीं आसानी से वित्तीय संस्थाओं, यानी बैंकों से ऋण लेने सहित व्यवसाय, भवन निर्माण या अन्य कार्यों के लिए भी ऋण प्राप्त करने में आसानी रहेगी। उल्लेखनीय है कि इंदौर जिले में भी इस योजना के तहत सर्वे का काम चल रहा है और अधिकांश गांवों में सर्वे हो चुका है और 1 लाख 30 हजार से अधिक लाभान्वितों को चिह्नित भी कर लिया है। अब चूंकि रजिस्ट्री करवाने की प्रक्रिया के साथ-साथ शासन के वित्त विभाग ने पंचायत और अन्य उपकर में छूट के आदेश भी जारी कर लिए हैं। इसमें आधा प्रतिशत शेष और 1 प्रतिशत पंचायत उपकर माफ रहेगा।
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