
इंदौर। मध्यप्रदेश सरकार (Government of Madhya Pradesh) की ओर से मंडी शुल्क में की गई बढ़ोतरी को लेकर अब सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस फैसले के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान कर दिया है। पार्टी का कहना है कि मंडी शुल्क बढ़ने का सीधा असर किसानों, व्यापारियों, आढ़तियों और अंततः आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। इसी मुद्दे को लेकर 31 जुलाई को प्रदेश के सभी जिलों में मंडी समितियों के बाहर प्रदर्शन कर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे।
वर्चुअल बैठक में बनी आंदोलन की रणनीति
कांग्रेस उद्योग एवं व्यापार प्रकोष्ठ की प्रदेश स्तरीय वर्चुअल बैठक में आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई। बैठक में प्रदेशभर के जिला पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया और सरकार के फैसले के खिलाफ एकजुट होकर विरोध दर्ज कराने का निर्णय लिया। पार्टी ने सभी जिला इकाइयों को आंदोलन की तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
कांग्रेस का आरोप- पहले ही सबसे ज्यादा शुल्क, अब फिर बढ़ोतरी
बैठक के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश में पहले से ही मंडी शुल्क देश के कई राज्यों की तुलना में अधिक है। इसके बावजूद सरकार ने शुल्क बढ़ाकर किसानों और व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है। कांग्रेस का कहना है कि इससे कृषि उपज का व्यापार प्रभावित होगा और बाजार व्यवस्था पर भी असर पड़ेगा।
किसानों और व्यापारियों के हित का मुद्दा बनाया
कांग्रेस ने इस मुद्दे को केवल राजनीतिक नहीं बल्कि किसानों और व्यापारियों के हित से जुड़ा मामला बताया है। पार्टी का दावा है कि बढ़े हुए शुल्क का असर कृषि उपज की लागत, व्यापारिक गतिविधियों और उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाली कीमतों पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से सरकार को अपना फैसला वापस लेना चाहिए।
31 जुलाई को हर जिले में होगा प्रदर्शन
कांग्रेस के मुताबिक 31 जुलाई को प्रदेश के सभी जिलों में मंडी समितियों के बाहर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर मंडी शुल्क बढ़ोतरी का आदेश वापस लेने की मांग की जाएगी। पार्टी का कहना है कि यदि सरकार ने मांग नहीं मानी तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
सरकार के फैसले पर बढ़ेगी सियासी गर्मी
मंडी शुल्क बढ़ाने के फैसले को लेकर अब प्रदेश में राजनीतिक माहौल गरमाने के संकेत मिल रहे हैं। एक ओर सरकार अपने निर्णय को राजस्व और मंडी व्यवस्था के लिए जरूरी बता सकती है, वहीं कांग्रेस इसे किसानों और व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ बताकर जनआंदोलन का मुद्दा बनाने की तैयारी में है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में प्रमुख विषय बन सकता है।
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