नई दिल्ली। देश में उच्च शिक्षा और शोध से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर (MP Shashi Tharoor) ने केंद्र सरकार से जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) की उपलब्धता और UGC-NET से जुड़े आंकड़ों पर अधिक पारदर्शिता की मांग की है। उनका कहना है कि शिक्षा मंत्रालय की ओर से मिले जवाब में मौजूदा योजनाओं का उल्लेख तो किया गया, लेकिन उन सवालों का स्पष्ट उत्तर नहीं दिया गया, जो शोधार्थियों की सबसे बड़ी चिंताओं से जुड़े हैं।
शशि थरूर ने कहा कि उन्होंने सरकार से यह जानकारी मांगी थी कि हर वर्ष कितने अभ्यर्थी UGC-NET परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं और उनमें से कितनों को JRF मिलती है। उनके अनुसार, मंत्रालय ने वर्षवार आंकड़े उपलब्ध कराने के बजाय केवल वर्तमान फेलोशिप योजनाओं और शोध वित्तपोषण के अन्य विकल्पों का उल्लेख किया।
थरूर का कहना है कि इससे यह स्पष्ट नहीं हो सका कि पात्र उम्मीदवारों और उपलब्ध फेलोशिप की संख्या के बीच वास्तविक अंतर कितना है।
कांग्रेस सांसद ने सरकार से यह भी पूछा कि क्या उसने JRF के लिए योग्य उम्मीदवारों और उपलब्ध फेलोशिप के बीच बढ़ते अंतर की समीक्षा की है। उन्होंने जानना चाहा कि क्या सरकार भविष्य में JRF की संख्या बढ़ाने या पात्रता से जुड़े नियमों में बदलाव करने पर विचार कर रही है।
उनके मुताबिक, शोध कार्य करने वाले विद्यार्थियों के लिए आर्थिक सहायता सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है और इस पर स्पष्ट नीति बनाए जाने की आवश्यकता है।
थरूर ने UGC की नॉन-NET फेलोशिप का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत मिलने वाली 8,000 रुपये प्रतिमाह की राशि लंबे समय से अपरिवर्तित है। उनका दावा है कि वर्ष 2006 के बाद इसमें उल्लेखनीय संशोधन नहीं हुआ, जबकि इस अवधि में महंगाई और शोध से जुड़ी लागत में काफी वृद्धि हुई है।
उन्होंने याद दिलाया कि यह विषय वर्ष 2023 में संसद के शून्यकाल के दौरान भी उठाया गया था, लेकिन अब तक सरकार की ओर से राशि बढ़ाने को लेकर कोई निश्चित समयसीमा या नीति सामने नहीं आई है।
थरूर का कहना है कि शोध को बढ़ावा देने के लिए केवल आर्थिक सहायता बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में बेहतर अनुसंधान सुविधाएं, गुणवत्तापूर्ण अकादमिक मार्गदर्शन और शोधार्थियों की शिकायतों के प्रभावी समाधान की व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
उनके अनुसार, भारत के रिसर्च इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए फेलोशिप व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि योग्य शोधार्थियों को उनकी क्षमता के अनुरूप सहयोग मिल सके।
UGC-NET देश में विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्यापन तथा शोध के लिए आयोजित प्रमुख राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा है। इसी परीक्षा के आधार पर सीमित संख्या में उम्मीदवारों को जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) प्रदान की जाती है, जिसके तहत शोध कार्य के लिए आर्थिक सहायता मिलती है।
हालांकि, पात्रता हासिल करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या उपलब्ध फेलोशिप से कहीं अधिक होने के कारण बड़ी संख्या में शोधार्थियों को वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी मुद्दे को लेकर अब संसद से लेकर अकादमिक जगत तक चर्चा तेज होती दिखाई दे रही है।
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