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सरकारी स्कूलों में किताबों का संकट

July 22, 2026

  • सत्र शुरू होने के महीनों बाद भी 8.5 लाख बच्चों को एक भी पुस्तक नहीं

भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए तीन महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन लाखों विद्यार्थियों तक अब भी पाठ्यपुस्तकें नहीं पहुंच सकी हैं। राज्य शिक्षा केंद्र की समीक्षा रिपोर्ट ने वितरण व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार पहली से आठवीं कक्षा के करीब 8.5 लाख विद्यार्थियों को अब तक एक भी पाठ्यपुस्तक नहीं मिली, जबकि 27 लाख से अधिक बच्चों को केवल कुछ विषयों की किताबें ही उपलब्ध कराई जा सकी हैं। इस स्थिति का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। शिक्षक भी बिना पूरी पाठ्यपुस्तकों के पढ़ाने को मजबूर हैं। राज्य शिक्षा केंद्र ने सभी जिला परियोजना समन्वयकों को लंबित वितरण तत्काल पूरा कराने के निर्देश दिए हैं।


  • रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम पहली से आठवीं कक्षा तक की करीब 97 प्रतिशत किताबें जिलों को उपलब्ध करा चुका है, लेकिन स्कूल स्तर पर वितरण में गंभीर लापरवाही सामने आई है। राज्य शिक्षा केंद्र ने निर्देश दिए हैं कि सभी जिलों में वितरण की नियमित समीक्षा की जाए, प्रत्येक विद्यार्थी तक सभी विषयों की पुस्तकें पहुंचाई जाएं और इसकी जानकारी शिक्षा पोर्टल 3.0 पर दर्ज की जाए।

    15 अप्रैल तक पूरा होना था वितरण
    स्कूल शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ 1 अप्रैल से पाठ्यपुस्तकों का वितरण शुरू किया था। विभागीय योजना के अनुसार 15 अप्रैल तक सभी विद्यार्थियों को सभी विषयों की किताबें मिल जानी थीं। इसके बाद ग्रीष्मकालीन अवकाश भी समाप्त हो चुका है और 16 जून से स्कूल दोबारा खुल गए, लेकिन जुलाई के मध्य तक भी वितरण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। 15 जुलाई तक की समीक्षा रिपोर्ट में यह स्थिति सामने आई है।

    राजधानी भोपाल सबसे पीछे
    पाठ्यपुस्तक वितरण में राजधानी भोपाल की स्थिति भी चिंताजनक है। यहां पहली से आठवीं तक कुल 63,890 विद्यार्थियों का नामांकन हुआ है। इनमें से 42 प्रतिशत यानी 26,854 छात्रों को सभी किताबें प्राप्त हुई हैं। जबकिकुछ विषयों की किताबें पाने वाले 16,435 और एक भी किताब नहीं मिलने वाले: 20,691 (करीब 32 प्रतिशत)छात्र हैं। इसी तरह अन्य बड़े शहरों में भी हजारों बच्चे अब तक किताबों का इंतजार कर रहे हैं। ग्वालियर में 20,063 विद्यार्थी, इंदौर में 19,456 विद्यार्थी, जबलपुर में 18,242 विद्यार्थीकिताब का इंतजार कर रहे हैं।

    इन जिलों में सबसे अधिक बच्चे बिना किताब
    राज्य शिक्षा केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार जिन जिलों में सबसे ज्यादा विद्यार्थियों को अब तक पाठ्यपुस्तकें नहीं मिल सकी हैं उनमें शिवपुरी में 30,581, खरगोन में 24,320, छतरपुर में 23,937, गुना में 23,909, सागर में 23,909, धार में 23,603, झाबुआ में 23,688, मंडला में 23,111, मुरैना में 22,755 और बड़वानी में 21,435 छात्र शामिल हैं।

    पढ़ाई पर पड़ रहा असर
    विशेषज्ञों का कहना है कि प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर समय पर पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं होने से बच्चों की सीखने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। कई स्कूलों में शिक्षक फोटोकॉपी, ब्लैकबोर्ड और साझा पुस्तकों के सहारे पढ़ाई करा रहे हैं। अब राज्य शिक्षा केंद्र ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन जिलों में वितरण लंबित है, वहां अभियान चलाकर जल्द से जल्द सभी विद्यार्थियों तक पाठ्यपुस्तकें पहुंचाई जाएं, ताकि शैक्षणिक गतिविधियां सामान्य रूप से संचालित हो सकें।

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