
चंडीगढ़ । कांग्रेस सांसद सैलजा (Congress MP Kumari Sailja) ने कहा कि केंद्र सरकार (Central Government) लोकतांत्रिक संवाद के बजाय दमन की राजनीति में विश्वास करती है (Believes in politics of Repression rather than Democratic Dialogue)।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई और उसके विरोध में संसद परिसर में विपक्ष द्वारा किए गए प्रदर्शन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि केंद्र सरकार लोकतांत्रिक संवाद के बजाय दमन की राजनीति में विश्वास करती है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के सभी सांसदों ने काले वस्त्र पहनकर संसद परिसर में शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया और छात्रों की आवाज़ को संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह बुलंद किया। कुमारी सैलजा ने कहा कि दिल्ली में छात्रों पर जिस प्रकार लाठीचार्ज किया गया, वह केवल कुछ युवाओं पर बल प्रयोग नहीं था, बल्कि उनके सपनों, उनके संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति पर हमला था। पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं से परेशान छात्र अपने भविष्य के लिए न्याय मांग रहे थे, लेकिन सरकार ने उनकी बात सुनने के बजाय बैरिकेड, पुलिस बल और लाठियों का सहारा लिया।
सांसद ने कहा कि छात्रों पर हुई इस कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री को देश से माफी मांगनी चाहिए तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए तत्काल इस्तीफा दें। कुमारी सैलजा ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष दोनों की समान भूमिका होती है। संसद जनता की आवाज़ उठाने का सर्वोच्च मंच है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि सरकार स्वयं सदन को सुचारु रूप से चलाने में रुचि नहीं दिखाती। जब विपक्ष छात्रों, किसानों, बेरोजगारी, महंगाई और जनहित के अन्य मुद्दे उठाना चाहता है तो चर्चा से बचा जाता है। ऐसे में जनता की आवाज़ सड़क पर पहुंचना स्वाभाविक हो जाता है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे लगातार देश के युवाओं, किसानों और आम नागरिकों के मुद्दे संसद में उठाने का प्रयास करते हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं दिया जाता। कल जिस प्रकार राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया गया, वह लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं था। आज संसद परिसर में विपक्ष का संयुक्त विरोध इस बात का प्रतीक है कि जनता की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता। सांसद ने कहा कि किसानों के साथ सरकार का रवैया भी किसी से छिपा नहीं है। लंबे किसान आंदोलन के दौरान संवाद के बजाय टकराव का वातावरण बनाया गया। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर किए गए वादे आज भी अधूरे हैं। यही कारण है कि किसानों, छात्रों और आम नागरिकों का सरकार पर भरोसा लगातार कमजोर हुआ है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की स्पष्ट मांग है कि संसद में पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की विफलताओं पर तत्काल विस्तृत चर्चा कराई जाए, शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें, पारदर्शी एवं सुरक्षित परीक्षा व्यवस्था लागू की जाए, शिक्षा व्यवस्था को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रखा जाए तथा परीक्षा संबंधी अनियमितताओं की स्थिति में पुनर्परीक्षा, उचित मुआवजा और छात्रों के अधिकारों की कानूनी गारंटी सुनिश्चित की जाए। सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति संवाद, जवाबदेही और जनभावनाओं के सम्मान में होती है, न कि दमन और बल प्रयोग में। यदि सरकार छात्रों, किसानों और विपक्ष की आवाज़ सुनने के बजाय हर विरोध को बलपूर्वक दबाने का प्रयास करेगी तो यह लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करेगा। कांग्रेस पार्टी देश के युवाओं, किसानों और आम नागरिकों के अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक पूरी मजबूती के साथ लड़ती रहेगी।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved