वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान (US-Iran) के बीच बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिकी जहाजों, कार्गो (American ships, cargo) या उनसे जुड़े किसी भी हित को नुकसान पहुंचता है, तो उसकी भरपाई अमेरिका के नियंत्रण में मौजूद ईरानी फंड से की जाएगी। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में समुद्री सुरक्षा, हूती हमलों और ईरान-अमेरिका टकराव को लेकर तनाव बना हुआ है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि अगले आदेश तक अमेरिकी जहाजों या मालवाहक संपत्तियों को होने वाले किसी भी नुकसान की आर्थिक भरपाई अमेरिका के नियंत्रण में मौजूद ईरानी धन से की जाएगी। उन्होंने इसे “न्यायसंगत और उचित” कदम बताते हुए कहा कि यदि नुकसान होता है तो उसकी जिम्मेदारी ईरान पर तय की जाएगी।
ट्रंप प्रशासन लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि यमन के हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन प्राप्त है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि यदि हूती समूह द्वारा समुद्री जहाजों पर हमले जारी रहते हैं, तो अमेरिका इसकी जवाबदेही सीधे ईरान पर तय करेगा।
रिपोर्टों के अनुसार, विभिन्न देशों में ईरान की अरबों डॉलर की संपत्तियां प्रतिबंधों के कारण फ्रीज हैं। ट्रंप के बयान से संकेत मिलता है कि यदि अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचता है तो अमेरिका इन फंडों का उपयोग क्षतिपूर्ति के लिए करने की कोशिश कर सकता है।
हालांकि, ऐसे किसी कदम के लिए कानूनी और अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक होगा और इस पर आगे संबंधित संस्थानों का निर्णय महत्वपूर्ण रहेगा।
ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अमेरिकी प्रशासन पर आक्रामक नीति अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि इस तरह का रवैया क्षेत्र में तनाव को और बढ़ाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि लगातार दबाव की नीति के परिणाम अमेरिका को भी भुगतने पड़ सकते हैं।
ट्रंप ने अपने बयान में ईरान के परमाणु कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उनके अनुसार, यह अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सभी पक्षों से संयम बरतने और विवाद का समाधान कूटनीतिक माध्यमों से निकालने की अपील की है।
विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच लगातार तीखी बयानबाजी और सैन्य तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा पर पड़ सकता है।
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