नई दिल्ली। सोने (Gold) की कीमतों में लगातार तेजी के बीच चीन (China) ने कीमती धातु की खरीदारी जारी रखी है। चीन के केंद्रीय बैंक पीपल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) ने अगस्त 2026 में अपने स्वर्ण भंडार में करीब 20 टन से अधिक सोना जोड़ा। इसके साथ ही चीन का गोल्ड रिजर्व बढ़ाने का सिलसिला लगातार 22वें महीने भी जारी रहा।
ताजा खरीदारी के बाद चीन का स्वर्ण भंडार करीब 2,387 टन पहुंच गया है। चीन की लगातार बढ़ती गोल्ड खरीदारी को केवल निवेश के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। विशेषज्ञ इसे विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता घटाने की चीन की दीर्घकालिक रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं।
चाइना डेली की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में चीन के केंद्रीय बैंक के स्वर्ण भंडार में जुलाई के अंत की तुलना में करीब 6,50,000 औंस की वृद्धि हुई। अक्टूबर 2023 के बाद किसी एक महीने में यह सबसे बड़ी बढ़ोतरी बताई गई है। अक्टूबर 2023 में चीन ने अपने गोल्ड रिजर्व में करीब 7,40,000 औंस की बढ़ोतरी की थी।
बीते तीन महीनों में चीन की गोल्ड खरीदारी भी अक्टूबर 2023 के बाद के स्तर पर सबसे अधिक रही है। इस तरह लगातार महंगे होते सोने के बावजूद चीन की खरीदारी में कमी नहीं आई है।
चीन की लगातार गोल्ड खरीदारी के पीछे उसकी व्यापक आर्थिक और रणनीतिक सोच मानी जा रही है। चीन अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है। इसके तहत वह अमेरिकी डॉलर के अलावा सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है।
सोने को किसी एक देश की मुद्रा या वित्तीय प्रणाली से सीधे जुड़ा नहीं माना जाता। ऐसे में केंद्रीय बैंकों के लिए यह विदेशी मुद्रा भंडार में जोखिम को संतुलित करने का एक माध्यम हो सकता है। चीन की लगातार खरीदारी को इसी नजरिए से देखा जा रहा है।
वैश्विक व्यापार और वित्तीय व्यवस्था में अमेरिकी डॉलर की अहम भूमिका है। चीन लंबे समय से अपने विदेशी मुद्रा भंडार और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय स्थिति को अधिक विविध बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
ऐसे में सोने की खरीदारी चीन को डॉलर आधारित परिसंपत्तियों पर अपनी निर्भरता कम करने में मदद कर सकती है। साथ ही वैश्विक आर्थिक या भू-राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति में स्वर्ण भंडार एक सुरक्षित संपत्ति के तौर पर काम कर सकता है।
चीन के केंद्रीय बैंक की लगातार 22 महीने की गोल्ड खरीदारी अपने आप में महत्वपूर्ण है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, यह 2015 के बाद चीन की गोल्ड खरीदारी का सबसे लंबा लगातार सिलसिला है।
इससे संकेत मिलता है कि चीन के लिए गोल्ड रिजर्व बढ़ाना कोई अल्पकालिक कदम नहीं, बल्कि लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा है। लगातार खरीदारी के जरिए चीन अपने रिजर्व को मजबूत करने के साथ वैश्विक वित्तीय जोखिमों के खिलाफ सुरक्षा कवच भी तैयार करना चाहता है।
आमतौर पर कीमतों में तेजी आने पर किसी वस्तु की खरीदारी में कमी देखने को मिल सकती है, लेकिन चीन के मामले में तस्वीर अलग है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें ऊंचे स्तर पर होने के बावजूद PBOC की खरीदारी जारी है।
इसका मतलब यह है कि चीन की प्राथमिकता केवल तत्काल मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि अपने रणनीतिक रिजर्व को मजबूत करना है। आने वाले समय में यदि चीन इसी गति से सोना खरीदता रहा तो वैश्विक स्वर्ण बाजार और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी के रुझान पर इसका असर दिखाई दे सकता है।
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