
पटना: नीट पेपर लीक प्रकरण (NEET Paper Leak) और दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ हुई दंडात्मक कार्रवाई के विरोध में आइसा (AISA) तथा अन्य छात्र संगठनों के ‘बिहार बंद’ का मिला-जुला और कई स्थानों पर हिंसक असर देखने को मिला. राज्य के कई जिलों में सड़कों पर उतरे उग्र प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बलों, अधिकारियों और मीडियाकर्मियों को निशाना बनाया, वहीं कुछ स्थानों पर छात्राओं ने अनोखे अंदाज में शांतिपूर्ण विरोध भी दर्ज कराया.
औरंगाबाद के रमेश चौक पर सुबह 11:30 बजे तक स्थिति शांत थी, लेकिन दोपहर 12 बजे अचानक बड़ी संख्या में छात्र एकत्र हो गए. प्रदर्शनकारियों ने सड़क की एक लेन जाम कर केंद्र सरकार व शिक्षा मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. स्थिति तब बिगड़ी जब उग्र भीड़ ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए और नारियल के टुकड़े व सामान फेंककर पथराव शुरू कर दिया. जवाब में पुलिस ने अश्रुगैस के गोले छोड़े और हल्का बल प्रयोग किया. इस हिंसा में हवालदार मो. मतलूब अली, दैनिक जागरण के पत्रकार मनीष तिवारी और मो. रिजवान नामक युवक घायल हो गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.
भागलपुर में स्टूडेंट प्रोटेस्ट के नाम पर तिलकामांझी चौक से लेकर कचहरी चौक तक उपद्रवियों ने भारी तांडव मचाया. पुलिस द्वारा रोकने पर उग्र युवकों ने ईंट-पत्थरों से हमला बोल दिया. उपद्रवियों ने एक चैनल के पत्रकार पर हमला किया. साथ ही पुलिस व आम नागरिकों के 5-6 वाहनों को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया. मौके पर पहुंचीं जिलाधिकारी अलंकृता पांडे और SSP प्रमोद कुमार यादव के वाहनों पर भी पथराव किया गया. इसके बाद पुलिस ने मोर्चा संभालते हुए तिलकामांझी से मनाली चौक व समाहरणालय तक उपद्रवियों को दौड़ा-दौड़ा कर खदेड़ा और कई लोगों को हिरासत में लिया.
राजधानी पटना में बंद समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी नोक-झोंक हुई. रामगुलाम चौक पर तौलिए और मास्क से चेहरा ढके उपद्रवियों ने पुलिस की कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की और उन्हें पलट दिया. डाक बंगला चौराहा और पटना जंक्शन के बीच पुलिस और आइसा कार्यकर्ताओं में झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग कर प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा. इस बीच पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव भी गांधी मैदान पहुंचे और छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई.
एक दिन पूर्व जहानाबाद में डीएम आवास पर हुए पथराव, हवाई फायरिंग और हिंसक झड़पों के बाद शुक्रवार को पूरा शहर पुलिस छावनी में तब्दील रहा. मगध क्षेत्र के आईजी विकास वैभव ने स्वयं संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण कर पुलिस अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए. वहीं एसपी के नेतृत्व में भारी पुलिस बल चौक-चौराहों और सरकारी इमारतों पर तैनात रहा, जिससे बंद के दौरान किसी बड़ी अनहोनी को रोका जा सके.
समस्तीपुर में आइसा और आरवाईए (RYA) कार्यकर्ताओं ने जिला सचिव सुनील कुमार के नेतृत्व में समस्तीपुर-पटना मुख्य मार्ग और ताजपुर के पास नेशनल हाईवे पर आगजनी कर यातायात पूरी तरह ठप कर दिया. प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्र नेताओं के बीच तीखी बहस, नोक-झोंक और हाथापाई हुई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. प्रदर्शनकारी गिरफ्तार कार्यकर्ताओं को रिहा करने और नई शिक्षा नीति (NEP) रद्द करने की मांग कर रहे थे.
मधेपुरा में विभिन्न छात्र संगठनों के बैनर तले छात्र टी.पी. कॉलेज के पास इकट्ठा होकर समाहरणालय का घेराव करने निकल रहे थे. कॉलेज चौक पर अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) संतोष कुमार और एसडीपीओ प्रवेंद्र भारती के नेतृत्व में तैनात पुलिस बल ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक लिया. जबरन आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे करीब डेढ़ दर्जन छात्र नेताओं को पुलिस ने डिटेन कर सदर थाना भेज दिया.
जहां एक ओर पूरे राज्य में हिंसा का माहौल था, वहीं दरभंगा में छात्राओं ने विरोध का बेहद अनोखा और शांतिपूर्ण तरीका अपनाया. कर्पूरी चौक से लहेरियासराय टावर तक निकाली गई ‘तिरंगा यात्रा’ में शामिल छात्राओं के हाथों में राष्ट्रीय ध्वज, फूलों की थाली और राखियां थीं. छात्रा स्वाति के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा में मुस्तैद पुलिस जवानों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा और फूल भेंट कर यह संदेश दिया कि उनका आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए है, न कि उपद्रव के लिए.
बेतिया में करीब 3,000 की संख्या में एकत्र प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी बहस के बाद ईंट-पत्थर चलने लगे, जिसके जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को खदेड़ दिया. शिवहर में सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट साझा करने और कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने की साजिश के आरोप में एसपी शैलेंद्र सिंह के निर्देश पर पुलिस ने 9 व्यक्तियों को हिरासत में ले लिया. वैशाली एसपी शुभांक मिश्रा के निर्देश पर शहर में अलर्ट जारी रहा. सदर एसडीपीओ सुबोध कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने दंगा निरोधक वाहनों के साथ पूरे शहर में फ्लैग मार्च किया और स्थिति पूरी तरह नियंत्रित रखी.
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