नई दिल्ली/कोलकाता। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन समाप्त हो गया है। हालांकि आंदोलन खत्म होने के साथ ही अब सुरक्षा एजेंसियों का फोकस प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और उपद्रव में शामिल लोगों पर कार्रवाई करने पर है। इसी क्रम में कोलकाता पुलिस ने 24 जुलाई को छात्रों की रैली के दौरान हुई हिंसा और पत्रकारों पर कथित हमलों के मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया है।
कोलकाता के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) कुणाल अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि गिरफ्तार किए गए सभी 11 आरोपियों की पहचान कर ली गई है। पुलिस के अनुसार, जांच में अब तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि गिरफ्तार लोग छात्र थे। अधिकारियों का दावा है कि ये लोग प्रदर्शन के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ करने के इरादे से भीड़ में शामिल हुए थे।
पुलिस का कहना है कि इन आरोपियों ने कथित तौर पर रैली की आड़ में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और मीडियाकर्मियों को निशाना बनाने की कोशिश की।
जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि कुछ आरोपी राज्य छोड़कर भागने की तैयारी में थे। पुलिस के मुताबिक, दो मुख्य आरोपी मोहम्मद आजाद और मोहम्मद अफरोज को अंडाल के पास दुर्गापुर एक्सप्रेसवे से गिरफ्तार किया गया, जब वे पश्चिम बंगाल से बाहर निकलने का प्रयास कर रहे थे।
गिरफ्तार अन्य आरोपियों की पहचान इरफान खुर्शीद, अरशद अली उर्फ साजिद, मोहम्मद मोइनुद्दीन, मोहम्मद आलमगीर उर्फ राजू, इमरान अहमद उर्फ गोपी, खालिद रजा उर्फ रिंकू, जमीर अहमद उर्फ मिंकू, मोहसिन खान और दीपक भौमिक उर्फ विकी के रूप में की गई है।
24 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान कई पत्रकारों के साथ मारपीट और हमले की घटनाएं सामने आई थीं। पुलिस का कहना है कि मीडिया कर्मियों को निशाना बनाने के आरोपों की भी गंभीरता से जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, हिंसा में शामिल किसी भी व्यक्ति को कानून के दायरे में लाया जाएगा।
फिलहाल सभी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हिंसा किसी बड़ी साजिश का हिस्सा थी या इसके पीछे किसी संगठित समूह की भूमिका थी।
इस बीच दिल्ली में 20 जुलाई को जंतर-मंतर और संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा की भी जांच जारी है। पुलिस के अनुसार, उस दिन हुई झड़पों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी घायल हुए थे। जांच के तहत घटनास्थल पर लगे फेस रिकॉग्निशन कैमरों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की मदद से संदिग्ध लोगों की पहचान की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन की आड़ में हिंसा, तोड़फोड़ या कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
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