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बर्फीले इलाकों में जवानों की सुरक्षा बढ़ाएगी स्मार्ट वर्दी, हिमस्खलन में भी मिलेगी सटीक लोकेशन

July 28, 2026


नई दिल्ली । बर्फीले और अत्यधिक दुर्गम इलाकों में तैनात भारतीय सैनिकों (Indian Soldiers) की सुरक्षा (Safety) को नई तकनीकी मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। रक्षा अनुसंधान (Defence Research) से जुड़े वैज्ञानिक ऐसे स्मार्ट यूनिफॉर्म (Smart Uniform) के विकास पर काम कर रहे हैं, जो हिमस्खलन, बर्फीले तूफान या ग्लेशियर जैसी आपात परिस्थितियों में सैनिक की लोकेशन का पता लगाने में सहायता करेगी। इस तकनीक का उद्देश्य बचाव अभियान (Rescue Operation) को अधिक तेज, सटीक और प्रभावी बनाना है, जिससे संकट में फंसे जवानों तक कम समय में पहुंचा जा सके।

इस परियोजना पर रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की कानपुर स्थित डिफेंस मैटेरियल्स एंड स्टोर्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट ने सेना की आवश्यकताओं के अनुरूप कार्य शुरू किया है। इसके लिए उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी संस्थान के साथ संयुक्त अनुसंधान और प्रोटोटाइप निर्माण की प्रक्रिया भी आरंभ कर दी गई है। दोनों संस्थान मिलकर ऐसी स्मार्ट वर्दी विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं, जो कठिन मौसम और बर्फीले वातावरण में भी विश्वसनीय ढंग से कार्य कर सके।

प्रस्तावित स्मार्ट यूनिफॉर्म में विशेष कंडक्टिव इंक की सहायता से कपड़े पर इलेक्ट्रॉनिक सर्किट प्रिंट किए जाएंगे। इन सर्किटों को जीपीएस मॉड्यूल, माइक्रो-इलेक्ट्रॉनिक चिप और अन्य आवश्यक सेंसरों से जोड़ा जाएगा। पूरी तकनीक वर्दी के भीतर ही समाहित रहेगी, जिससे सैनिक को अतिरिक्त भारी उपकरण साथ रखने की आवश्यकता नहीं होगी। वैज्ञानिकों का लक्ष्य ऐसी तकनीक विकसित करना है, जो लंबे समय तक उपयोग, मोड़ने, पहनने और धुलाई के बाद भी अपनी कार्यक्षमता बनाए रखे।

यदि किसी सैनिक के साथ हिमस्खलन, बर्फीले तूफान या ग्लेशियर क्षेत्र में कोई दुर्घटना होती है और वह बर्फ के नीचे दब जाता है, तो वर्दी में मौजूद इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली सक्रिय रहकर उसकी उपलब्ध या अंतिम लोकेशन का संकेत बचाव दल तक पहुंचाने का प्रयास करेगी। इससे रेस्क्यू टीम को विशाल बर्फीले क्षेत्र में अनुमान के आधार पर खोज अभियान चलाने के बजाय संभावित स्थान तक सीधे पहुंचने में सुविधा मिलेगी। इससे बचाव कार्य की गति बढ़ने के साथ-साथ जवान के सुरक्षित मिलने की संभावना भी अधिक हो सकती है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंचाई वाले बर्फीले इलाकों में कई बार खराब मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण खोज एवं बचाव अभियान लंबा खिंच जाता है। ऐसे मामलों में सैनिकों या शहीद जवानों का पता लगाने में कई दिन तक लग सकते हैं। नई स्मार्ट वर्दी इस चुनौती को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण तकनीकी सहायता प्रदान कर सकती है और खोज अभियान को अधिक सटीक बना सकती है।

परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल प्राथमिक लक्ष्य लोकेशन ट्रैकिंग आधारित स्मार्ट यूनिफॉर्म का सफल प्रोटोटाइप तैयार करना है। इसके बाद भविष्य में इसमें सैनिक की शारीरिक स्थिति, शरीर का तापमान, हृदय गति और अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतकों की निगरानी जैसी अतिरिक्त सुविधाएं भी जोड़ी जा सकती हैं। इससे कमांड सेंटर को वास्तविक समय में सैनिकों की स्थिति की जानकारी मिल सकेगी और आवश्यक होने पर समय रहते सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।


  • सियाचिन, लद्दाख और अन्य ऊंचाई वाले बर्फीले क्षेत्रों में तैनात भारतीय सैनिकों के लिए यह तकनीक भविष्य में महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच साबित हो सकती है। यदि इसका परीक्षण और विकास सफल रहता है, तो यह न केवल खोज एवं बचाव अभियानों को अधिक प्रभावी बनाएगी, बल्कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सैन्य अभियानों की सुरक्षा और दक्षता बढ़ाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाएगी।

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