वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) ने दावा किया है कि अमेरिका (US) ने ईरान (Iran) के खिलाफ द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर ली थी, लेकिन अंतिम समय में इस अभियान को रोक दिया गया। ट्रंप के मुताबिक, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सहित खाड़ी देशों के नेताओं के अनुरोध और कूटनीतिक प्रयासों को मौका देने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार थी और रविवार को बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की योजना बनाई गई थी। हालांकि, प्रमुख क्षेत्रीय नेताओं के साथ बातचीत के बाद उन्होंने हमले को फिलहाल टालने का निर्णय लिया।
न्यू जर्सी के बेडमिन्स्टर स्थित अपने गोल्फ क्लब से वाशिंगटन लौटते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने बताया कि उन्होंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से सीधा सवाल किया कि क्या सैन्य कार्रवाई की जानी चाहिए।
ट्रंप के अनुसार, क्राउन प्रिंस ने जवाब दिया कि क्षेत्र में हमले की बजाय समझौते को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, क्योंकि किसी बड़े सैन्य अभियान के परिणाम कितनी दूर तक जाएंगे, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है। ट्रंप ने कहा कि इसी बातचीत के बाद उन्होंने सैन्य विकल्प पर तत्काल अमल करने के बजाय कूटनीति को और समय देने का फैसला किया।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि शनिवार को हुई बातचीत के बाद पश्चिम एशिया के सहयोगी देशों ने पिछले कई महीनों से जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक संभावित समझौते की रूपरेखा तैयार कर ली है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि इस प्रस्ताव का उद्देश्य क्षेत्र में तनाव कम करना और स्थिरता बहाल करना है।
यह बयान ट्रंप के हालिया सख्त रुख से अलग माना जा रहा है। इससे एक दिन पहले उन्होंने कहा था कि ईरान के साथ बातचीत पर उनका भरोसा कम हो रहा है और जरूरत पड़ने पर अमेरिकी सेना बेहद कड़ी कार्रवाई करेगी।
ट्रंप ने कहा कि प्रस्तावित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने का मुद्दा भी शामिल है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और लंबे समय से क्षेत्रीय तनाव का केंद्र बना हुआ है।
हालांकि, ईरान ने ट्रंप के दावों से अलग रुख अपनाया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति युद्ध शुरू होने से पहले जैसी नहीं हो सकती। उन्होंने बताया कि ईरान इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही को लेकर ओमान के साथ चर्चा कर रहा है, लेकिन फिलहाल जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने पर कोई औपचारिक वार्ता नहीं चल रही है।
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को अंतिम समय में टालने का दावा किया है। इससे पहले भी कई अवसरों पर उन्होंने हमले रोकने या कूटनीति को प्राथमिकता देने की बात कही, लेकिन हालात बिगड़ने पर दोनों देशों के बीच तनाव फिर बढ़ता रहा। ऐसे में अब यह देखना होगा कि प्रस्तावित कूटनीतिक प्रयास स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ते हैं या क्षेत्र में एक बार फिर सैन्य टकराव की स्थिति बनती है।
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