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OPS पर केंद्र ने संसद में दिया दो टूक जवाब, नहीं है बहाली का कोई प्रस्ताव; राजस्थान-पंजाब समेत राज्यों पर छोड़ा फैसला

August 11, 2026

नई दिल्ली। पुरानी पेंशन योजना(Old Pension Scheme) को लेकर लंबे समय से चल रही बहस के बीच केंद्र सरकार (Central Government)ने संसद(Parliament) में अपना रुख साफ कर दिया है। केंद्र ने स्पष्ट किया है कि केंद्रीय कर्मचारियों(Central government employees) के लिए पुरानी पेंशन योजना यानी OPS को दोबारा लागू करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में लिखित जवाब देते हुए कहा कि पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने पर केंद्र सरकार की ओर से कोई फैसला प्रस्तावित नहीं है। सरकार ने इसके पीछे सरकारी खजाने पर पड़ने वाली अस्थिर वित्तीय देनदारी को भी एक अहम वजह बताया है।

संसद में दिए गए जवाब में सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अलग अलग राज्यों में पुरानी पेंशन योजना लागू करने का फैसला संबंधित राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है। राजस्थान छत्तीसगढ़ झारखंड पंजाब और हिमाचल प्रदेश की सरकारों ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली यानी NPS से OPS में लौटने के अपने फैसले की जानकारी केंद्र सरकार और पेंशन निधि नियामक एवं विकास प्राधिकरण यानी PFRDA को दी है। केंद्र ने कहा है कि राज्यों का यह फैसला उनकी नीतिगत पसंद और राज्य के अधिकार क्षेत्र का विषय है।

हालांकि OPS में लौटने वाले राज्यों के सामने जमा पेंशन राशि को लेकर बड़ी व्यावहारिक चुनौती भी बनी हुई है। वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि मौजूदा नियमों के तहत NPS के अंतर्गत कर्मचारियों के खाते में जमा संचित कोष को राज्य सरकारों को वापस करने का कोई प्रावधान नहीं है। इसमें सरकारी अंशदान कर्मचारियों का योगदान और उससे हुई बचत शामिल है। यानी किसी राज्य के OPS में वापस जाने का फैसला लेने के बावजूद NPS के तहत जमा पूरा फंड राज्य सरकार को वापस ट्रांसफर करने की व्यवस्था मौजूदा नियमों में नहीं है।

केंद्र सरकार ने संसद में यह भी बताया कि उसने अपने कर्मचारियों के पेंशन लाभ में सुधार के लिए यूनिफाइड पेंशन स्कीम यानी UPS शुरू की है। यह योजना एक अप्रैल 2025 से NPS के तहत आने वाले केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक विकल्प के रूप में लागू की गई है। सरकार के अनुसार UPS का उद्देश्य कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद अधिक निश्चित और बेहतर पेंशन सुरक्षा उपलब्ध कराना है। इसके तहत पात्र कर्मचारियों के लिए न्यूनतम सुनिश्चित भुगतान का प्रावधान किया गया है और महंगाई से जुड़े लाभ भी दिए जाते हैं।

सरकार के जवाब के मुताबिक NPS को एक जनवरी 2004 या उसके बाद केंद्र सरकार की सेवा में शामिल होने वाले कर्मचारियों के लिए लागू किया गया था। इसमें सशस्त्र बलों को अलग रखा गया था। NPS मूल रूप से परिभाषित योगदान आधारित पेंशन व्यवस्था है। इसमें कर्मचारी और सरकार दोनों की ओर से योगदान किया जाता है और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाला लाभ संचित राशि और निवेश से जुड़े प्रदर्शन पर निर्भर करता है।

कर्मचारियों के पेंशन लाभ को लेकर उठती मांगों के बीच केंद्र सरकार ने पहले भी NPS में सुधार की संभावनाओं पर विचार किया था। इसके लिए तत्कालीन वित्त सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। समिति ने विभिन्न हितधारकों के साथ चर्चा के बाद पेंशन व्यवस्था में सुधार से जुड़े सुझाव दिए थे। इन्हीं प्रयासों के बाद केंद्र सरकार ने UPS को NPS के तहत विकल्प के तौर पर लागू किया।


  • दूसरी ओर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG ने भी राज्यों में OPS बहाली के वित्तीय प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। पुरानी पेंशन व्यवस्था में कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद निश्चित पेंशन मिलती है और इसका बड़ा वित्तीय भार सरकार पर पड़ता है। इसी वजह से केंद्र सरकार का कहना है कि केंद्रीय स्तर पर OPS की बहाली से सरकारी वित्त पर लंबे समय तक अस्थिर देनदारी बढ़ सकती है।

    इस पूरे मामले में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि केंद्र सरकार ने पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू करने की किसी भी संभावना से इनकार कर दिया है। वहीं राजस्थान पंजाब हिमाचल प्रदेश छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे राज्यों को अपने स्तर पर OPS को लेकर फैसला लेने की स्वतंत्रता है। ऐसे में सरकारी कर्मचारियों की नजर अब राज्यों के फैसलों और UPS के भविष्य पर टिकी हुई है।

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