
नई दिल्ली। देश (Country)में बढ़ती ड्रग्स तस्करी (Drug trafficking)और नशीले पदार्थों(Narcotic substances) के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court) ने गंभीर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत (Apex Court)ने साफ कहा कि यह समस्या अब बेहद गंभीर रूप ले चुकी है और इससे निपटने के लिए किसी एक एजेंसी के प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। केंद्र और राज्य सरकारों की अलग अलग एजेंसियों को आपसी तालमेल के साथ काम करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों को नोटिस जारी किया है। मामला नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों की जांच और सुनवाई के लिए पूरे देश में एक समान व्यवस्था तैयार करने की मांग से जुड़ा है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि ड्रग्स का खतरा गंभीर है और इससे निपटने के लिए विशेषज्ञ एजेंसियों के संयुक्त प्रयास जरूरी हैं। अदालत के मुताबिक जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के साथ ऐसा प्रभावी तंत्र तैयार किया जाना चाहिए जिससे ड्रग्स की तस्करी पर रोक लगाने के साथ ही आरोपियों के खिलाफ जांच और मुकदमे की प्रक्रिया भी तय समय में पूरी हो सके।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में दावा किया गया है कि देश में नशीले पदार्थों की तस्करी और इनके दुरुपयोग की समस्या तेजी से बढ़ रही है। याचिका के अनुसार 2025 में ड्रग्स से जुड़े मामलों में 53 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और करीब 1240 टन नशीले पदार्थ जब्त किए गए। याचिकाकर्ता का कहना है कि ड्रग्स की लत केवल किसी एक व्यक्ति की समस्या नहीं रहती बल्कि इसका सीधा असर पूरे परिवार पर पड़ता है। नशे का बढ़ता कारोबार संगठित अपराध और आतंकी गतिविधियों के लिए आर्थिक मदद का जरिया भी बन सकता है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने विदेशों से पंजाब में नशीले पदार्थों की तस्करी का मुद्दा उठाया। वहीं पीठ के अन्य न्यायाधीशों ने भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और ड्रग्स उत्पादन वाले क्षेत्रों से उसकी भौगोलिक निकटता का उल्लेख किया। अफगानिस्तान और म्यांमार जैसे क्षेत्रों का संदर्भ देते हुए अदालत ने ड्रग्स तस्करी के सीमा पार नेटवर्क और इसके सुरक्षा संबंधी पहलुओं को भी महत्वपूर्ण माना।
याचिका में एनडीपीएस कानून के तहत जांच अभियोजन सजा और पुनर्वास की पूरी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश देने की मांग की गई है। इसमें नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों की समयबद्ध जांच और सुनवाई के लिए एक समान मानक संचालन प्रक्रिया लागू करने की मांग शामिल है। इसके अलावा फॉरेंसिक साइंस लैब की रिपोर्ट जमा करने के लिए निश्चित समय सीमा तय करने तथा तलाशी जब्ती और नमूने लेने की प्रक्रिया के लिए पूरे देश में एक समान एसओपी बनाने का सुझाव दिया गया है।
याचिकाकर्ता ने एनडीपीएस मामलों की सुनवाई के लिए पर्याप्त संख्या में विशेष अदालतें गठित करने की भी मांग की है ताकि लंबे समय तक मुकदमे लंबित न रहें। तलाशी जब्ती और नमूने लेने की कार्रवाई की अनिवार्य डिजिटल रिकॉर्डिंग और वीडियोग्राफी का प्रावधान करने की मांग भी याचिका में की गई है। साथ ही नए मनोप्रभावी पदार्थों की पहचान कर उन्हें समय रहते प्रतिबंधित सूची में शामिल करने के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने का सुझाव दिया गया है।
याचिका में ड्रग्स तस्करी से अर्जित संपत्तियों की पहचान और जब्ती की प्रक्रिया को भी समयबद्ध बनाने की मांग की गई है। इसके साथ ही पुनर्वास व्यवस्था को मजबूत करने और इस पूरे मुद्दे का व्यापक अध्ययन कराने की आवश्यकता बताई गई है। सुप्रीम कोर्ट का यह रुख ऐसे समय आया है जब ड्रग्स तस्करी को केवल कानून व्यवस्था की समस्या नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था से जुड़ी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है। अब केंद्र और राज्यों के जवाब के बाद अदालत इस मामले में आगे की दिशा तय कर सकती है।
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