
सरकारी स्कूलों में लेटलतीफी पर सख्ती, विद्यार्थियों की पढ़ाई से समझौता नहीं
इंदौर। सरकारी स्कूलों (Government schools) में शिक्षकों (Teachers) की लेटलतीफी और समय पर पाठ्यक्रम (Syllabus) पूरा नहीं होने की शिकायतों को लेकर भोपाल के उच्च अधिकारी अब सख्त हो गए हैं। हाल ही में हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Video conferencing) में स्कूल शिक्षा विभाग के कमिश्नर ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को ई-अटेंडेंस व्यवस्था कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए हैं। मकसद साफ है—शिक्षक समय पर स्कूल पहुंचें, कक्षाएं नियमित लगें और विद्यार्थियों का पाठ्यक्रम समय पर पूरा हो।
प्राचार्यों और प्रशासनिक अधिकारियों को सुबह 10 बजे तक स्कूल में उपस्थित रहना अनिवार्य होगा, जबकि शिक्षकों को सुबह 10.30 बजे तक ई-अटेंडेंस दर्ज करना जरूरी होगा। समय पर उपस्थिति दर्ज नहीं करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की तैयारी भी की जा रही है। पूर्व में रोके गए वेतन के मामलों को लेकर भी अधिकारियों के स्तर पर चर्चा चल रही है। ई-अटेंडेंस को केवल कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था न मानकर विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई, समय पर पाठ्यक्रम पूरा कराने और बेहतर परीक्षा परिणाम से जोडक़र देखा जा रहा है।
नेटवर्क की समस्या वाले स्कूलों की बनेगी अलग सूची
ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के जिन स्कूलों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या है, उनकी अलग सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य वास्तविक तकनीकी समस्या और लापरवाही के बीच अंतर स्पष्ट करना है, ताकि ई-अटेंडेंस व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू हो सके।
इंदौर में रसूख के सहारे ‘बंक’ पर नजर
इंदौर शहर और ग्रामीण क्षेत्र के कुछ सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के समय पर नहीं पहुंचने की शिकायतें सामने आती रही हैं। कार्रवाई से बचने के लिए राजनीतिक या प्रशासनिक प्रभाव का इस्तेमाल किए जाने की चर्चाओं ने भी विभाग की चिंता बढ़ाई है। अब ई-अटेंडेंस के जरिए ऐसी गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी है।
विद्यार्थियों के हित में समय पर पढ़ाई सबसे अहम
विभाग की सख्ती का सबसे बड़ा उद्देश्य विद्यार्थियों के हित में है। शिक्षक समय पर पहुंचेंगे तो कक्षाएं नियमित लगेंगी और त्रैमासिक व अर्धवार्षिक परीक्षाओं से पहले पाठ्यक्रम पूरा कराया जा सकेगा। अधिकारियों का मानना है कि शिक्षक की गैरहाजिरी या देरी का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और परीक्षा परिणाम पर पड़ता है।
वेतन रोकने पर भी सख्ती के संकेत
समय पर स्कूल नहीं पहुंचने और अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों के खिलाफ पूर्व में की गई कार्रवाई की भी समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों के बीच वेतन रोकने की कार्रवाई को लेकर भी चर्चा हुई है। विभाग का संकेत है कि अब उपस्थिति के मामले में किसी तरह की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
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