
इन्दौर। मातृत्व जैसी संवेदनशील स्थिति में महिलाओं को सुरक्षित और स्वच्छ माहौल देने के लिए बने एमटीएच महिला अस्पताल में व्यवस्थाओं की तस्वीर चिंता बढ़ाने वाली है। स्थिति यह है कि अस्पताल सिर्फ भगवान भरोसे ही चल रहा है। यहां एक बेड पर दो से तीन महिलाएं लेटी दिखाई देती हैं तो कुछ महिलाएं जमीन पर नजर आती हैं। अस्पताल के अलग-अलग हिस्सों में गंदगी, चोक ड्रेनेज, खराब बाथरूम और बेड की कमी मरीजों और परिजनों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है, वहीं कर्मचारियों के विवाद की स्थिति भी चर्चाओं में हैं।
जिस अस्पताल में महिलाएं जिंदगी की सबसे बड़ी पीड़ा झेलकर बच्चे को जन्म देने पहुंचती हैं, वहां उन्हें इलाज से पहले यहां की अव्यवस्थाओं से सामना करना पड़ रहा है। दर्द से कराहती महिलाओं को महाराजा तुकोजीराव होलकर महिला अस्पताल (एमटीएच) में कहीं फर्श पर खून और आसपास गंदगी दिखाई देती है तो कहीं खून से सने कपड़े और बाथरूम में भरा मल-मूत्र, जो न केवल व्यवस्था की हकीकत बयां कर रहे हैं, बल्कि सबसे चौंकाने वाली तस्वीर यह है कि एक ही बेड पर दो-तीन महिलाओं को एडजस्ट कर इलाज किया जा रहा है। प्रसूति वार्डों में जगह की कमी का असर सीधे मरीजों पर दिखाई दे रहा है। कुछ स्थानों पर एक ही बेड पर दो-तीन से महिलाओं को एडजस्ट करने की स्थिति सामने आ रही है। कई महिलाओं को अपने छोटे बच्चों के साथ उसी पलंग पर जगह बनाकर रहना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा सेंसिटिव या हाई ब्लड प्रेशर और एचआईवी पॉजिटिव महिलाओं को भी एक साथ रखा जा रहा है।
जहां-तहां गंदगी, खून के धब्बों की भी शिकायत
अस्पताल के कई हिस्सों में सफाई व्यवस्था का आलम यह है कि प्रसूति वार्ड, जिसे सबसे ज्यादा साफ-सुथरा और डिसइनफेक्टेंट होना चाहिए, वहां जहां-तहां खून बसरा हुआ है। फर्श और वार्ड के आसपास गंदगी। प्रसूति अस्पताल में नवजात और माताओं की मौजूदगी को देखते हुए नियमित और प्रभावी सफाई जरूरी है, जो कि नहीं हो रही, इसलिए आए दिन डिलेवरी के बाद टांके खुलने और पकने की समस्याएं और शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
चोक ड्रेनेज, बाथरूम में यूरिन-मल जमा
अस्पताल प्रबंधन के प्रयास के बाद अस्पताल 400 बेड का बना, लेकिन ड्रेनेज सिस्टम 60 बेड के अस्पताल के आधार पर ही डाला गया, जिसकी स्थिति यह है कि बाथरूमों की स्थिति खराब है। चोक के कारण मरीज के साथ-साथ अटेंडर भी बदबू से परेशान है, वहीं वार्ड में उपयोग किए जाने वाले बाथरूम मूत्र और मल से भरे पड़े हैं। दुर्गंध और गंदगी की समस्या बनी हुई है।
साबुन भी घर से ला रहे हैं
व्यवस्था का एक और गंभीर पहलू महिलाओं की ही सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। अस्पताल की व्यवस्थाओं का आलम यह है कि यहां सर्जरी के पहले डॉक्टर को हाथ धोने के लिए साबुन उपलब्ध नहीं हो रहे। अस्पताल के बिटाडीन से ही हाथ धोकर कम चलाया जा रहा है । कुछ डॉक्टरों ने घर से साबुन लाने की बात कही। सर्जरी से पहले हाथों की स्वच्छता संक्रमण नियंत्रण का अहम हिस्सा है, इसलिए अस्पताल में इसकी नियमित उपलब्धता जरूरी है।
बेड बढ़ाए सुविधाएं नहीं
एमटीएच का पुराना अस्पताल 65 बेड से शुरू हुआ था। बाद में क्षमता बढ़ाने की योजनाएं बनीं और नया भवन करीब 400 बेड की क्षमता के साथ तैयार हुआ, लेकिन मौजूदा हालात में सवाल यह है कि बेड और भवन बढ़ने के साथ मरीजों के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं उसी अनुपात में नहीं बढ़ाई गईं। महिलाओं को न इलाज मिल रहा है न स्वच्छताऔर न सुरक्षित माहौल।
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