
बीजिंग। चीन ने बुधवार को कहा कि भारत-चीन सीमा पर स्थिति फिलहाल आम तौर पर स्थिर है। हालांकि, उसने अरुणाचल प्रदेश में सीमा के पास चीनी सेना की गतिविधियां बढ़ने संबंधी खबरों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं भारत ने कहा कि भारत ने कहा कि चीन के साथ संबंधों को बेहतर बनाने के लिए सीमा पर शांति बेहद जरूरी है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन मीडिया के इन सवालों का जवाब दे रहे थे कि क्या हाल में भारत के साथ कोई सैन्य घटना हुई है और क्या चीन ने अरुणाचल प्रदेश की सीमा के पास अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ा दी हैं। चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता है। गुओ ने कहा, चीन-भारत सीमा पर स्थिति फिलहाल आम तौर पर स्थिर है। उन्होंने बताया कि बीजिंग और नयी दिल्ली ने भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श एवं समन्वय के लिए गठित कार्य तंत्र की 36वीं बैठक पिछले हफ्ते आयोजित की थी। गुओ ने कहा, दोनों पक्षों ने कूटनीतिक और सैन्य माध्यमों से बातचीत जारी रखने तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में संयुक्त रूप से शांति एवं स्थिरता कायम रखने पर सहमति जताई।
भारत ने कहा कि चीन के साथ संबंधों को बेहतर बनाने के लिए सीमा पर शांति बेहद जरूरी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, सीमा से जुड़े मुद्दों को भारत सबसे गंभीर विषय मानता है। इस संबंध में चीन के साथ लगातार बातचीत होती रही है। सीमा की स्थिति का असर दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर भी पड़ेगा। विदेश मंत्रालय का यह अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी इलाके में चीनी सैनिकों के आक्रामक रुख अपनाने की अपुष्ट खबरों के बीच आया। पिछले एक सप्ताह में भारत की ओर से यह दूसरा ऐसा बयान है।
भारत ने अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों और भौगोलिक क्षेत्रों की पहचान उनके आधिकारिक नामों से करने के अपने फैसले की चीन की ओर से की गई आलोचना को भी खारिज कर दिया। उसने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का एक अटूट एवं अभिन्न हिस्सा है और इस अविवादित सत्य को कोई नहीं बदल सकता। वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवां घाटी में हुई भीषण झड़प और उसके बाद चार साल से ज्यादा समय तक चले सैन्य टकराव के कारण भारत और चीन के रिश्तों में भारी तनाव आ गया था। इसके बाद द्विपक्षीय रिश्तों को फिर से बेहतर बनाने के लिए दोनों देशों ने पिछले करीब एक साल से ज्यादा समय में कई कदम उठाए हैं।
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