नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान (The United States and Iran) के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर गतिरोध गहरा गया है। ईरान (Iran) ने सात दिन के भीतर जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और परमाणु वार्ता (Nuclear talks) शुरू करने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे खारिज कर दिया है। ईरान का कहना है कि वह बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहता है, लेकिन अपनी सुरक्षा और आर्थिक हितों से जुड़े मुद्दों पर समझौता करने के लिए तैयार नहीं है।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि उनका देश संभावित बड़े सैन्य टकराव के लिए भी तैयार है, लेकिन शांति की किसी संभावना को खत्म नहीं करना चाहता। उन्होंने कहा कि तेहरान एक तरफ किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है और दूसरी तरफ कूटनीतिक समाधान की कोशिश भी जारी रखना चाहता है।
होर्मुज को लेकर बातचीत में गतिरोध
फारस की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। मौजूदा अमेरिका-ईरान संघर्ष में इसकी स्थिति सबसे अहम मुद्दों में से एक बन गई है।
अराघची ने 25 सितंबर को बताया था कि ईरान ने मध्यस्थ कतर के जरिए अमेरिका को सात दिन का रोडमैप दिया है। प्रस्ताव के तहत अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटने, तेल बिक्री पर प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय युद्धविराम जैसी शर्तें पूरी होने पर ईरान एक सप्ताह के भीतर होर्मुज खोल सकता है और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू कर सकता है।
हालांकि, ट्रंप ने 26 सितंबर को इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने भी कहा कि ईरान की ओर से रखी गई मांगों में पहले ही व्यापक रियायतें मांगी गई थीं। उनके मुताबिक अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए सभी विकल्प खुले रखेगा।
ईरान की प्रमुख शर्तें क्या हैं?
ईरान की ओर से सामने रखे गए प्रस्ताव में अमेरिकी सैन्य दबाव और नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करने, ईरानी तेल की बिक्री पर प्रतिबंधों में राहत तथा विदेशों में जमा ईरानी संपत्तियों को जारी करने जैसी मांगें शामिल हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने क्षेत्रीय युद्धविराम की शर्त भी रखी है। कुछ रिपोर्टों में जमे हुए ईरानी फंड में करीब 12 अरब डॉलर का उल्लेख है।
अराघची का कहना है कि मध्यस्थों के माध्यम से ईरान ने अपनी शर्तें अमेरिकी पक्ष तक पहुंचा दी हैं। हालांकि, 27 सितंबर तक ईरान का कहना था कि उसे मध्यस्थों के जरिए अमेरिका की ओर से औपचारिक जवाब नहीं मिला है।
ईरान बातचीत के साथ सैन्य तैयारी का भी दे रहा संदेश
कूटनीतिक गतिविधियों के बीच ईरानी सैन्य नेतृत्व की ओर से भी सख्त बयान सामने आए हैं। ईरानी सेना के कमांडर-इन-चीफ अमीर हातमी ने कहा है कि युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ है और ईरान को भविष्य में संभावित हमलों के लिए तैयार रहना होगा।
अराघची ने भी अमेरिका के साथ संभावित संघर्ष को लेकर ईरान की तैयारी का संकेत दिया है। हालांकि, उन्होंने साथ ही कहा कि तेहरान बातचीत और शांति की संभावना को खत्म नहीं करना चाहता। इससे संकेत मिलता है कि ईरान सैन्य दबाव के बीच कूटनीतिक विकल्प भी खुला रखना चाहता है।
ईरान का अमेरिकी अंडरवाटर ड्रोन कब्जे में लेने का दावा
इसी बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना ने अमेरिकी मानवरहित अंडरवाटर वाहन को कब्जे में लेने का दावा किया है। ईरानी पक्ष ने इसे रेमस 600 बताया है और कहा है कि वाहन को तकनीकी विशेषज्ञों के हवाले किया गया है ताकि उससे जानकारी हासिल की जा सके।
आईआरजीसी ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में अनधिकृत आवाजाही की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
तेल बाजार पर भी पड़ रहा सीधा असर
होर्मुज संकट का असर अब क्षेत्रीय संघर्ष से आगे बढ़कर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे रहा है। जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के कारण कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है। दूसरी ओर, अमेरिका-ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक प्रगति की खबरों पर तेल कीमतों में गिरावट भी दर्ज की गई है।
होर्मुज से जुड़े किसी भी लंबे व्यवधान का असर तेल आपूर्ति, परिवहन लागत और उपभोक्ता महंगाई पर पड़ सकता है। यही वजह है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की हर गतिविधि पर वैश्विक ऊर्जा बाजार की नजर बनी हुई है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल गतिरोध का मुख्य बिंदु यही है कि ईरान होर्मुज खोलने को अपनी शर्तों से जोड़ रहा है, जबकि अमेरिका उन शर्तों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। ट्रंप के प्रस्ताव खारिज करने के बाद तत्काल समझौते की संभावना पर अनिश्चितता बढ़ी है। दूसरी ओर, ईरान अभी भी मध्यस्थों के जरिए संपर्क बनाए हुए है और बातचीत को पूरी तरह बंद करने की घोषणा नहीं की है।
आने वाले दिनों में संकट का रुख सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक बातचीत—दोनों दिशाओं में बदल सकता है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार, दोनों के लिए प्रमुख संकेतक बनी रहेगी।
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