
नई दिल्ली। चीन (China) में लोगों की धार्मिक मान्यताएं (Religious beliefs) कथित तौर पर सरकारी संस्थानों (Government institutions) में होने वाली नियमित जांच का हिस्सा बनती जा रही हैं। चेंगदू के एक सरकारी अस्पताल में स्थायी कर्मचारियों के अलावा कॉन्ट्रैक्ट और अस्थायी कर्मचारियों (Employees) से भी उनकी धार्मिक मान्यताओं की जानकारी मांगे जाने की रिपोर्ट सामने आई है। कर्मचारियों से पूछा गया कि वे किसी धर्म को मानते हैं या नहीं। जिनकी कोई धार्मिक आस्था नहीं है, उनकी जानकारी भी दर्ज किए जाने की बात कही गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल ने इसे कर्मचारियों की धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा व्यापक सर्वे बताया। इस प्रक्रिया को वैचारिक, जातीय और धार्मिक मामलों की नियमित जांच से जोड़े जाने का दावा किया गया है। खास बात यह है कि इसमें कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य भी शामिल थे। पार्टी सदस्यों के लिए धार्मिक आस्था रखना प्रतिबंधित बताया गया है। यदि कोई कर्मचारी खुद को धार्मिक बताता है, तो उसे इसकी जानकारी अपनी पार्टी शाखा को देने के लिए कहा गया।
स्कूलों में छात्रों और परिवारों की भी जांच
धार्मिक पहचान की कथित निगरानी केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट में सिचुआन के एक विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कर्मचारी के हवाले से दावा किया गया है कि शिक्षण संस्थानों में छात्रों के साथ उनके परिवारों की धार्मिक पृष्ठभूमि की जानकारी भी जुटाई जा रही है। यह जानकारी उच्च अधिकारियों तक भेजे जाने की बात कही गई है।
चेंगदू के शिक्षा विभाग से जुड़े एक कर्मचारी के मुताबिक, बच्चों के स्कूल में दाखिले से पहले उनके परिवारों की नियमित पृष्ठभूमि जांच की जाती है। इसमें परिवार की धार्मिक पहचान से जुड़ी जानकारी भी शामिल होने का दावा किया गया है। यानी कथित तौर पर धार्मिक आस्था की निगरानी व्यक्ति से आगे उसके परिवार तक भी पहुंच रही है।
धर्म पर चीन की बढ़ती निगरानी
चीन में धार्मिक गतिविधियों पर कम्युनिस्ट पार्टी का नियंत्रण पहले से ही सख्त रहा है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में धार्मिक मामलों पर पार्टी की निगरानी को और मजबूत करने पर जोर दिया गया है। चीन की ‘सिनिसाइजेशन ऑफ रिलिजन’ नीति के तहत धार्मिक संगठनों और उनकी गतिविधियों को चीनी राजनीतिक एवं सांस्कृतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप ढालने की कोशिश की जाती है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved