
नई दिल्ली ।राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (National Council Of Educational Research And Training) ने कक्षा 11वीं और 12वीं की राजनीतिक विज्ञान (Political Science) की नई पाठ्यपुस्तकें (New Textbooks) तैयार करने वाली समिति का पुनर्गठन (Reconstitution) किया है। नई 20 सदस्यीय टीम में विश्वविद्यालयों (Universities) के शिक्षक, स्कूल शिक्षक और NCERT से जुड़े शिक्षाविद शामिल किए गए हैं। समिति को दोनों कक्षाओं के लिए नई किताबें तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।
नई समिति में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली, जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल, पांडिचेरी विश्वविद्यालय और उत्कल विश्वविद्यालय से जुड़े शिक्षकों को शामिल किया गया है। इसके अलावा स्कूल शिक्षा और पाठ्यक्रम से जुड़े विशेषज्ञ भी टीम का हिस्सा हैं।
समिति के गठन के बाद इसमें शामिल कुछ सदस्यों के पुराने या मौजूदा संगठनात्मक संबंधों को लेकर भी चर्चा शुरू हुई है। समिति में कम से कम चार ऐसे सदस्यों का उल्लेख किया गया है, जिनका संबंध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या उससे जुड़े संगठनों तथा भारतीय जनता पार्टी से जुड़े छात्र या राजनीतिक संगठनों से रहा है।
इनमें वंदना मिश्रा का नाम शामिल है, जो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की पूर्व राष्ट्रीय सचिव रह चुकी हैं और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं। यदुनाथ देशपांडे भी समिति के सदस्य हैं। उनका संबंध विद्यार्थी परिषद से रहा है और उनके पेशेवर परिचय में राजनीतिक सलाहकार के तौर पर भी जानकारी दी गई है।
समिति में प्रशांत दिवेकर भी शामिल हैं, जो पुणे की ज्ञान प्रबोधिनी से जुड़े हैं। इसके अलावा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के शिक्षाविद रवि रामचंद्र शुक्ला का नाम भी समिति में है। वह रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी से जुड़े इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेटिक लीडरशिप द्वारा प्रकाशित एक जर्नल के संपादकीय बोर्ड से जुड़े रहे हैं।
हालांकि, समिति की पूरी संरचना केवल इन सदस्यों तक सीमित नहीं है। इसमें अलग-अलग विश्वविद्यालयों और संस्थानों के कई शिक्षाविद शामिल हैं। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से प्रकाश कंडपाल और रवि शुक्ला, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली से निधि गुप्ता, चाणक्य विश्वविद्यालय से चेतन सिंघई, दिल्ली विश्वविद्यालय से सुकनशिका वात्सा और इग्नू से सतीश कुमार समेत अन्य सदस्य भी इसमें शामिल हैं।
नई पाठ्यपुस्तकों को तैयार करने की जिम्मेदारी टेक्स्टबुक डेवलपमेंट टीम को दी गई है। इस टीम की अध्यक्षता शिक्षाविद और राजनीतिक विश्लेषक संदीप शास्त्री कर रहे हैं। समिति को राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2023 के अनुरूप किताबें तैयार करने का कार्य सौंपा गया है।
समयसीमा के अनुसार कक्षा 11वीं की राजनीतिक विज्ञान की नई किताब को 30 नवंबर 2026 तक अंतिम रूप दिए जाने का लक्ष्य है। वहीं कक्षा 12वीं की पुस्तक के लिए 30 जुलाई 2027 तक की समयसीमा निर्धारित की गई है। यानी दोनों कक्षाओं की किताबें एक साथ तैयार नहीं होंगी और पहले 11वीं की पुस्तक को अंतिम रूप दिए जाने की योजना है।
पाठ्यपुस्तकों के निर्माण में सामाजिक विज्ञान, भाषाओं, भारतीय ज्ञान प्रणाली, पर्यावरण शिक्षा और शिक्षाशास्त्र से जुड़े पाठ्यक्रम समूहों से मार्गदर्शन लेने की व्यवस्था की गई है। समीक्षा प्रक्रिया में सांस्कृतिक जुड़ाव, समावेशन, शैक्षणिक तकनीक, मूल्यांकन और भारतीय ज्ञान प्रणाली जैसे पहलुओं पर भी विचार किया जाएगा।
NCERT के अनुसार, समिति का पुनर्गठन पाठ्यपुस्तकों की तैयारी को अधिक व्यवस्थित और मजबूत बनाने के उद्देश्य से किया गया है। अंतिम शिक्षण सामग्री को मंजूरी देने, प्रकाशित करने और विद्यार्थियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी NCERT के पास ही रहेगी। नई किताबों में राजनीतिक विज्ञान के विषयों को किस तरह प्रस्तुत किया जाएगा, इस पर अब समिति के काम और आगामी मसौदे पर नजर रहेगी।
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