
नई दिल्ली. संसद (Parliament) के मानसून सत्र (Monsoon Session) ने सत्रावसान में देरी का करीब साढ़े चार दशक का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। माना जा रहा है कि सरकार ने परिसीमन (Delimitation Bill) से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को अमली जामा पहनाने का विकल्प अब भी खुला रखा है। इसके लिए सरकार अब भी मानसून सत्र के विस्तार की कोशिश में जुटी है। बृहस्पतिवार को गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) की दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक के बहाने दक्षिण भारत के राज्यों की सरकार से संवाद को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
मानसून सत्र अब भी तकनीकी रूप से जीवित है
उल्लेखनीय है कि 13 अगस्त को ही मानसून सत्र समाप्त हो गया था, लेकिन 8 दिन बाद भी इसके सत्रावसान की घोषणा नहीं की गई है। इसलिए मानसून सत्र अब भी तकनीकी रूप से जीवित है और सरकार जरूरत पड़ने पर इसे विस्तार देने का फैसला कर सकती है। सत्तर के दशक के बाद यह पहला मौका है जब सत्र समाप्ति की घोषणा के 8 दिन बाद भी सत्रावसान की घोषणा नहीं हुई है।
सत्रावसान में 6 से 20 दिन का समय लगता था
1952 से सत्तर के दशक तक सत्र समाप्त होने के बाद सत्रावसान में 6 से 20 दिन का समय लगता था। हालांकि 80 के दशक में व्यापक विमर्श के बाद यह अवधि घट कर 2 से 4 दिन की रह गई। पिछले साढ़े चार दशक की अवधि में यह पहला मौका है जब सत्र समाप्त होने के 8 दिन बाद भी सत्रावसान की घोषणा नहीं की गई है।
प्रक्रिया सरल पर राष्ट्रपति को अब तक सलाह नहीं
सत्रावसान की प्रक्रिया जटिल नहीं है। संसद के दोनों सदनों को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल राष्ट्रपति को सत्रावसान की सलाह देता है। इसके बाद राष्ट्रपति के आदेश से सत्रावसान की प्रक्रिया पूरी हो जाती है। इस बार 13 अगस्त को सत्र खत्म होने के बाद मंत्रिमंडल की दो बैठकें हो चुकी हैं, मगर सत्रावसान के लिए राष्ट्रपति को सलाह नहीं दी गई है।
सरकार के पास संख्याबल, फिर भी अड़चन…
सरकार के सूत्र ने कहा कि इस बिल के लिए जरूरी दो तिहाई बहुमत का सवाल नहीं है। सरकार के पास संख्याबल है। चूंकि यह संविधान संशोधन विधेयक है, ऐसे में इसे पेश करते समय सदन में व्यवस्था बनी रहनी चाहिए। इसे हंगामे के बीच पेश नहीं किया जा सकता। सरकार की कोशिश इसके लिए कांग्रेस के इतर विपक्षी दलों के बड़े हिस्से को राजी करना है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved