
नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह (Union Minister Giriraj Singh) ने कहा, राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को अहंकार में ज्यादा नहीं बोलना चाहिए (Should not speak too much out of Arrogance) ।
गिरिराज सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “राहुल गांधी, अहंकार में आकर मर्यादा मत भूलिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार न डरी है, न झुकी है। सरकार अपनी नीतियों और कर्तव्य पथ पर अडिग होकर जनसेवा का कार्य कर रही है।” उन्होंने आगे लिखा, “जिनकी माता जी ने शादी के 15 साल बाद तक भारत की नागरिकता नहीं ली और जो खुद दोहरी नागरिकता के घेरे में हैं, वो हमें राष्ट्रधर्म और संविधान न सिखाएं। पूरा देश आपकी असलियत देख रहा है।” गिरिराज सिंह ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर कहा, “राहुल गांधी से अहंकारी मैंने नहीं देखा। शायद वे ‘गीता’ नहीं पढ़े हैं; सरकार नहीं डरी है। सरकार की ओर से नीतियों और कर्तव्यों के तरह काम किया गया है, लेकिन राहुल गांधी को अहंकार में ज्यादा नहीं बोलना चाहिए, दुनिया देख रही है कि वे क्या हैं?
भाजपा नेता टीआर श्रीनिवास ने कहा, “कल राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर हुई कथित घटना को लेकर पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में जो एफआईआर का ड्रामा किया, उस पर मैं उनसे यह कहना चाहता हूं कि 80 और 90 के दशक में ‘बकरा किश्तों पे’ नाम का एक ड्रामा हुआ करता था। अब आप जो कर रहे हैं, वह ‘पॉलिटिक्स किश्तों पे’ है। असल में यही हो रहा है। आप (राहुल) फुल-टाइम पॉलिटिशियन नहीं हैं। वे अपनी मर्जी से आते हैं, थोड़ा ड्रामा करते हैं और चले जाते हैं। उन्होंने यही किया है। वे यह कहने की कोशिश कर रहे हैं कि कोई सबूत नहीं है, कोई सबूत नहीं है। बिना सबूत के आप कोई ड्रामा नहीं कर सकते। उनका पूरा दावा ही बेबुनियाद है।” भाजपा के राष्ट्रीय सचिव के. सुरेंद्रन ने कहा, “नड्डा जी ने जो कहा है, वह बिल्कुल साफ है। वह (राहुल गांधी) अब विपक्ष के नेता नहीं, बल्कि अर्बन नक्सलियों के नेता हैं।”
शिवसेना नेता शायना एनसी ने कहा, “राहुल गांधी ने सिर्फ़ प्रोपेगैंडा की राजनीति की है। इसीलिए हम कहते हैं कि उन्हें विपक्ष के नेता का पद छोड़कर ‘प्रोपेगैंडा के नेता’ का पद संभाल लेना चाहिए। वे जहाँ भी जाते हैं, वहाँ सिर्फ़ दिखावा, फ़ोटो खिंचवाने का मौका, मेलोड्रामा और समय-समय पर ऐसी नौटंकी करते हैं, जिसका मक़सद साफ़ तौर पर सिर्फ़ लोगों का ध्यान खींचना होता है। उनके पास कोई विजन, कोई प्लान और कोई एजेंडा नहीं है। इसलिए दुख की बात है कि राहुल गांधी को अपनी रणनीति बदलनी होगी।”
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