नई दिल्ली। भारत अपनी वैश्विक आर्थिक (Global economic) और व्यापारिक पहुंच को लगातार विस्तार देने में जुटा है। इसी रणनीति के तहत अगले कुछ हफ्तों में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, (Nirmala Sitharaman,) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) और वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल अमेरिका, कनाडा, जापान, अर्जेंटीना, चिली और ब्राजील का दौरा करेंगे।
इन यात्राओं का फोकस सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है। भारत निवेश बढ़ाने, नए बाजार तलाशने, व्यापारिक साझेदारी मजबूत करने और सप्लाई चेन को ज्यादा विविध बनाने पर भी जोर दे रहा है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की यात्रा की शुरुआत कनाडा से होगी। वह 26 और 27 अगस्त को कनाडा में रहेंगी। कनाडा के वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप चैंपेन के साथ वह पहली वित्त मंत्रियों की आर्थिक एवं वित्तीय वार्ता में हिस्सा लेंगी।
बैठक में आर्थिक विकास, वित्तीय क्षेत्र में सहयोग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा प्राथमिकताओं जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
इसके बाद सीतारमण 31 अगस्त से 1 सितंबर तक अमेरिका के ऐशविले में होने वाली G20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक में हिस्सा लेंगी। इस दौरान अमेरिकी अधिकारियों के अलावा निवेशकों से भी उनकी मुलाकात प्रस्तावित है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल जापान के चार दिवसीय दौरे पर जाएंगे। भारत और जापान के बीच व्यापार एवं निवेश संबंधों को और मजबूत करना इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य है।
गोयल के साथ करीब 200 सदस्यों वाला भारतीय उद्योग प्रतिनिधिमंडल भी जापान जाएगा। दोनों देश भारत-जापान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते यानी CEPA के जरिए द्विपक्षीय व्यापार को और बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
जापान भारत में प्रमुख विदेशी निवेशकों में शामिल है और 1,400 से ज्यादा जापानी कंपनियां भारत में काम कर रही हैं। ऐसे में भारतीय पक्ष की कोशिश नए निवेश और कारोबार के अवसर बढ़ाने की होगी।
सितंबर के आखिरी सप्ताह में गोयल अमेरिका भी जाएंगे। वह 30 सितंबर को मिल्वौकी में होने वाली G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल दक्षिण अमेरिका के एक सप्ताह के दौरे पर रहेंगे। उनका कार्यक्रम 24-25 अगस्त अर्जेंटीना, 26 अगस्त चिली और 27-28 अगस्त ब्राजील का है।
इस दौरे के जरिए भारत दक्षिण अमेरिकी देशों के साथ व्यापार और आर्थिक सहयोग बढ़ाने के साथ नए निवेश अवसर तलाशने की कोशिश करेगा।
भारत और चिली के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुकी है। दोनों देशों के बीच फिलहाल प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (PTA) है, जिसे व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते यानी CEPA में बदलने की कोशिश हो रही है।
इस बातचीत में भारत के लिए महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुंच और चिली के लिए भारतीय बाजार में बेहतर पहुंच अहम मुद्दे हैं।
अर्जेंटीना और ब्राजील के दौरे का एक बड़ा उद्देश्य MERCOSUR के साथ भारत के व्यापारिक संबंधों को विस्तार देना है। इस दक्षिण अमेरिकी समूह में अर्जेंटीना, ब्राजील, पैराग्वे, उरुग्वे और बोलीविया शामिल हैं। वेनेजुएला को 2016 में निलंबित किया गया था।
भारत और MERCOSUR के बीच पहले से PTA मौजूद है। अब इसे विस्तार देने और व्यापार के दायरे को बढ़ाने के लिए बातचीत आगे बढ़ाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
भारत की इन उच्चस्तरीय यात्राओं को व्यापक आर्थिक रणनीति के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है। अमेरिका और जापान जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ निवेश और व्यापार संबंध मजबूत करने के साथ दक्षिण अमेरिका में नए बाजार तलाशना भारत के लिए महत्वपूर्ण है।
चिली के साथ CEPA, MERCOSUR के साथ व्यापार विस्तार और जापान के साथ निवेश सहयोग जैसे मुद्दे इस रणनीति के प्रमुख हिस्से हैं। कुल मिलाकर भारत की कोशिश वैश्विक व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के साथ-साथ नए बाजार, नए निवेश और वैकल्पिक सप्लाई चेन तैयार करने की है।
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