
नई दिल्ली। त्योहारी सीजन (Festive Season) में लगातार बढ़ रही महंगाई ने आम आदमी की कमर ही तोड़ दी है। गरीबों के घर का पूरा बजट ही बिगड़ गया है। इस सीजन की शुरुआत से पहले घरेलू और आयातित अरहर दाल की कीमतों (Imported Arhar dal Prices) में धीरे-धीरे मजबूती का रुख देखने को मिल रहा है। कम घरेलू आवक, मिलर्स की ओर से बढ़ती खरीदारी और आयातित स्टॉक में कमी के चलते प्रमुख उत्पादक मंडियों में अरहर के भाव सरकार द्वारा तय खरीफ समर्थन मूल्य 8,450 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर को छूने और पार करने लगे हैं। घरेलू मंडियों में अरहर की कीमतें एक साल में औसतन 26 से 27 फीसदी तक बढ़ गई हैं। आयातित दालों में चेन्नई लेमन तुअर में सबसे अधिक 36.55 फीसदी का उछाल आया है।
कमोडिटी रिसर्च फर्म आईग्रेन इंडिया के मुताबिक, 22 अगस्त को समाप्त सप्ताह के दौरान घरेलू अरहर के साथ-साथ म्यांमार और अफ्रीकी अरहर की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। चेन्नई लेमन तुअर 20 अगस्त के 7,900 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 24 अगस्त को 8,500 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। इसी तरह महाराष्ट्र की अकोला मंडी में भाव 8,550 रुपये और सोलापुर मंडी में 8,450 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किए गए हैं।
आगे कैसा रहेगा हाल
अरहर की कीमतों में मजबूती बनी रहेगी। सीमित आपूर्ति के चलते कीमतों को सहारा मिलता रहेगा। बाद में आयात बढ़ने और घरेलू खरीफ फसल बेहतर रहने से कीमतों में तेजी पर अंकुश लगेगा।
-राहुल चौहान, निदेशक, आइग्रेन
कीमतों में क्यों लगी है आग
– पुरानी फसल का स्टॉक घटने और नई खरीफ आवक में समय होने के कारण मंडियों में आपूर्ति बेहद सीमित है।
– महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कई प्रमुख अरहर उत्पादक इलाकों में बारिश की कमी।
– म्यांमार से धीमी आवक, ऊंचे मालभाड़े और अफ्रीका में नई फसल की उपलब्धता को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण बंदरगाहों पर स्टॉक कम बना हुआ है, जो कीमतों को सहारा दे रहा है।
मसूर दाल भी हो सकती है महंगी
वैश्विक स्तर पर मसूर के सबसे बड़े निर्यातक देश कनाडा में उत्पादन में भारी गिरावट और भारत की कनाडा पर अत्यधिक निर्भरता के कारण आने वाले दिनों में मसूर दाल महंगी होने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं।
वर्ष 2026 : भारत आयातित मसूर का आधा हिस्सा अकेले कनाडा से खरीदता है।
11.47 लाख टन रहा भारत का कुल मसूर आयात
कनाडा से आयात : 5.33 लाख टन
2025-26 में कनाडा में मसूर उत्पादन 33.63 लाख टन था। 2026-27 में 25 लाख टन का अनुमान है।
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