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चंद्रचूड़ सिंह के परिवार में करोड़ों की प्रॉपर्टी का विवाद, भाई ने 7 लोगों पर दर्ज कराया मुकदमा; फर्जी वसीयत का आरोप

August 31, 2026

अलीगढ़। फिल्म अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह (Chandrachur Singh) के परिवार का वर्षों पुराना पुश्तैनी संपत्ति विवाद (Ancestral property dispute) अब पुलिस तक पहुंच गया है। अलीगढ़ में परिवार की करोड़ों रुपये की पैतृक संपत्ति और पुरानी हवेली को लेकर अभिनेता के भाई एवं फिल्म निर्देशक अभिमन्यु सिंह (Chandrachur Singh) ने सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। शिकायत में कथित फर्जी वसीयत तैयार करने, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक, सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे और विवादित वसीयत समेत संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराई जाएगी। फिलहाल शिकायत में लगाए गए सभी आरोप जांच के अधीन हैं।

सात लोगों को बनाया गया नामजद

अभिमन्यु सिंह की शिकायत पर 14 अगस्त को थाना रोरावर में मुकदमा दर्ज किया गया। इसमें गायत्री देवी, जय सिंह, अंजनी सिंह, राबिन एकसन, संदीप कुमार सिंह, शिव कुमार और अधिवक्ता अजीत सिंह तोमर को नामजद किया गया है।

शिकायत के अनुसार, परिवार की पुश्तैनी संपत्ति को कथित तौर पर एक फर्जी और अपंजीकृत वसीयत के आधार पर अपने नाम कराने का प्रयास किया गया। आरोप है कि इसी दस्तावेज के आधार पर राजस्व अभिलेखों में नामांतरण कराया गया और बाद में पैतृक जमीनों को बेच दिया गया।

विवादित संपत्ति में पुरानी हवेली के साथ कई पैतृक जमीनें भी शामिल बताई गई हैं, जिनकी कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है।



  • 1994 की पंजीकृत वसीयत का हवाला

    अभिमन्यु सिंह ने पुलिस को दिए प्रार्थनापत्र में संपत्ति के पुराने दस्तावेजों का भी उल्लेख किया है। उनके मुताबिक, उनकी दादी सीता देवी ने 18 अक्टूबर 1994 को एक पंजीकृत वसीयत बनाई थी। इसमें उन्होंने अपनी संपत्ति अपने पति हरेंद्र पाल सिंह के नाम की थी।

    शिकायतकर्ता के अनुसार सीता देवी का निधन वर्ष 1995 में हुआ। इसके बाद हरेंद्र पाल सिंह परिवार की संपत्ति के उत्तराधिकारी बने। उनका निधन 31 जनवरी 1997 को दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में हुआ था।

    यहीं से विवादित वसीयत को लेकर शिकायतकर्ता ने सवाल उठाए हैं।

    मौत से एक दिन पहले वसीयत बनाने का आरोप

    अभिमन्यु सिंह का आरोप है कि हरेंद्र पाल सिंह की मृत्यु से ठीक एक दिन पहले यानी 30 जनवरी 1997 को एक कथित फर्जी और अपंजीकृत वसीयत तैयार की गई। शिकायत में कहा गया है कि इस कथित वसीयत के जरिए पैतृक संपत्ति का बड़ा हिस्सा गायत्री देवी, उनकी बेटी अंजनी सिंह और बेटे जय सिंह के नाम किए जाने का उल्लेख था।

    शिकायतकर्ता ने वसीयत की वैधता पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि हरेंद्र पाल सिंह दिसंबर 1996 से गंभीर रूप से बीमार थे और बिस्तर पर थे। उनका आरोप है कि उनकी स्थिति ऐसी थी कि वह ठीक से लिखने-पढ़ने और लोगों को पहचानने की स्थिति में भी नहीं थे। ऐसे में मृत्यु से महज एक दिन पहले वसीयत तैयार किए जाने का दावा संदेह पैदा करता है।

    हालांकि, वसीयत वास्तव में फर्जी है या वैध, इसका फैसला जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगा।

    परिवार की सदस्य के बयान का भी जिक्र

    शिकायत में परिवार की सदस्य गिरजा कुमारी उर्फ गिरजा मनचंदानी के कथित बयान का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, गिरजा कुमारी ने कहा कि उनके सामने ऐसी कोई वसीयत नहीं बनाई गई थी और कथित दस्तावेज पर किए गए हस्ताक्षर भी वास्तविक नहीं हैं।

    अभिमन्यु सिंह ने इस कथित बयान को अपने आरोपों के समर्थन में महत्वपूर्ण आधार बताया है। पुलिस अब दस्तावेजों और संबंधित लोगों के बयानों की जांच करेगी।

    गवाह और वकील की भूमिका पर भी सवाल

    शिकायत में कथित वसीयत के गवाह के तौर पर संदीप कुमार सिंह का नाम होने की बात कही गई है। अभिमन्यु सिंह ने उन पर भी कथित फर्जीवाड़े में शामिल होने का आरोप लगाया है।

    इसके अलावा शिकायत में गंगा सिंह और अधिवक्ता अजीत सिंह तोमर पर कथित वसीयत तैयार करने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इसी वसीयत के आधार पर राजस्व न्यायालय में नामांतरण कराया गया और बाद में पैतृक जमीनों के हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

    अगर जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो पुलिस की जांच का दायरा वसीयत से आगे बढ़कर राजस्व रिकॉर्ड, जमीन की बिक्री और इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों तक जा सकता है।

    पहले भी अधिकारियों से की गई शिकायत

    यह विवाद नया नहीं है। चंद्रचूड़ सिंह और उनके भाई अभिमन्यु सिंह की ओर से पहले भी संपत्ति को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत किए जाने की बात सामने आई है। दोनों भाई इस मामले को लेकर एसएसपी और डीएम से भी मुलाकात कर चुके हैं।

    दूसरी ओर, दूसरे पक्ष की ओर से भी दोनों भाइयों पर आरोप लगाए जाने की बात कही गई है। ऐसे में पुलिस के सामने सभी पक्षों के दावों और दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच करना अहम होगा।

    पुलिस ने शुरू की जांच

    थाना रोरावर प्रभारी रविंद्र चंद्रवाल के मुताबिक, मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस सभी संबंधित पक्षों के बयान दर्ज करेगी और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच करेगी।

    जांच में कथित वसीयत के असली या फर्जी होने, उस पर किए गए हस्ताक्षरों, दस्तावेज तैयार होने की परिस्थितियों, गवाहों की भूमिका और राजस्व रिकॉर्ड में हुए नामांतरण की प्रक्रिया पर खास ध्यान दिया जाएगा।

    आगे अदालत तक जा सकता है विवाद

    करोड़ों रुपये की पुश्तैनी संपत्ति और पुरानी हवेली से जुड़ा यह विवाद आगे अदालत तक भी पहुंच सकता है। पुलिस आपराधिक आरोपों की जांच करेगी, जबकि संपत्ति पर वास्तविक अधिकार और कथित वसीयत की वैधता का फैसला सक्षम न्यायालय की प्रक्रिया के तहत हो सकता है।

    फिलहाल मुकदमे में लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है और किसी भी आरोपी को जांच पूरी होने से पहले दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। अब पुलिस की जांच से यह स्पष्ट होगा कि कथित वसीयत और संपत्ति के दस्तावेजों को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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