
नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने बुधवार को 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि (7.8 Percent GDP Growth) पर टिप्पणी को लेकर विपक्षी दलों और पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग (Subhash Garg) की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि आलोचक ‘सेब की तुलना सेब से करना’ भी नहीं जानते और देश की जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।
गौरतलब है कि संशोधित जीडीपी श्रृंखला के तहत, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर वास्तविक आधार पर 7.8 प्रतिशत रही। गोयल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी उथल-पुथल के बीच भारत ‘रेगिस्तान में नखलिस्तान’ की तरह है और देश दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से बढ़ता रहा है।
क्या बोले गोयल?
पीयूष गोयल ने कहा, “नकारात्मक बातें करने वाले लोग कुछ भी कहें, लेकिन 7.8 प्रतिशत की वृद्धि वास्तविकता है। जब मैं टेलीविजन पर कुछ विपक्षी नेताओं को देखता हूं,… किसी पूर्व वित्त सचिव या पूर्व रिजर्व बैंक गवर्नर को भी शामिल कर लें, जो दोनों ही उचित कारणों से भारत या सरकार में अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके।” गोयल ने कहा, वे सेब की तुलना सेब से करना भी नहीं जानते। वे पुरानी श्रृंखला की वृद्धि दर की तुलना नई श्रृंखला से करके भारत की जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि नई श्रृंखला में आधार वर्ष ही बदल गया है।
उन्होंने आगे कहा कि आलोचक वृद्धि के आंकड़ों में कमियां निकालने की कोशिश कर रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि ठीक है, 7.8 प्रतिशत की वृद्धि है, लेकिन रोजगार कहां हैं? हालांकि उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि कपड़ा क्षेत्र में श्रमिकों की मांग मजबूत है। उन्होंने तिरुपुर के उद्योग से अधिक श्रमिकों की मांग का उल्लेख करते हुए कहा, “तिरुपुर में एक लाख लोग भेज दीजिए, हम उन्हें काम देंगे।”
जानिए कुछ अहम सवालों के जवाब-
– सरकार ने जीडीपी आंकड़े का बचाव क्यों किया?
2.6% वृद्धि का दावा पुरानी और नई जीडीपी श्रृंखला के आंकड़ों को मिलाकर किया गया है, जो सही तुलना नहीं है।
– पुरानी-नई श्रृंखला में क्या अंतर?
पुरानी जीडीपी श्रृंखला में 2011-12 को आधार वर्ष बनाया गया था, जबकि फरवरी 2026 से नई श्रृंखला में 2022-23 को आधार वर्ष बनाया गया है।
– पिछले साल की जीडीपी का आंकड़ा क्यों बदला गया?
सरकार के अनुसार आंकड़ों में बदलाव सामान्य संशोधन प्रक्रिया का हिस्सा है। नई आधार श्रृंखला, बेहतर आंकड़ा स्रोत, नई आईआईपी और पीपीआई श्रृंखला और अतिरिक्त जानकारी मिलने के बाद आंकड़ों को संशोधित किया गया।
– फिर 7.8 प्रतिशत वास्तविक वृद्धि कैसे निकली?
आर्थिक वृद्धि की तुलना स्थिर कीमतों पर की जाती है। इससे कीमतों में बदलाव का असर हट जाता है और वास्तविक उत्पादन वृद्धि का पता चलता है। अप्रैल-जून तिमाही में इस्पात, सीमेंट और वाहनों समेत कई क्षेत्रों के उत्पादन में मजबूत वृद्धि हुई।
– विनिर्माण क्षेत्र में नकारात्मक डिफ्लेटर क्यों आया?
विनिर्माण क्षेत्र का वास्तविक जीवीए 9.2% बढ़ा, जबकि मौजूदा कीमतों पर वृद्धि 7.7% रही। डबल-डिफ्लेशन पद्धति में उत्पादन और कच्चे माल की कीमतों को अलग-अलग समायोजित किया जाता है। कच्चे माल की कीमतें ज्यादा तेजी से बढ़ती हैं तो नकारात्मक डिफ्लेटर आ सकता है।
– जीडीपी डिफ्लेटर और महंगाई दर अलग क्यों है?
जीडीपी डिफ्लेटर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव को दर्शाता है। खुदरा महंगाई घरेलू खपत की वस्तुओं और सेवाओं के एक निर्धारित समूह को मापता है, जबकि थोक महंगाई मुख्य रूप से वस्तुओं की थोक कीमतों पर आधारित है।
सरकार ने 2.6 प्रतिशत वृद्धि के दावे को नकारा
सरकार ने आर्थिक वृद्धि दर 2.6 प्रतिशत रहने के दावे को खारिज करते हुए कहा कि वृद्धि दर का आंकड़ा अर्थव्यवस्था के ठोस उत्पादन आंकड़ों पर आधारित है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग ने यह स्पष्टीकरण पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग की टिप्पणी के बाद दिया है। पूर्व वित्त सचिव का दावा है कि अगर पिछले साल की जून तिमाही की जीडीपी को करीब 86 लाख करोड़ रुपये से घटाकर 80 लाख करोड़ रुपये नहीं किया जाता तो वृद्धि करीब 2.6 प्रतिशत ही रहती।
नई श्रृंखला ज्यादा मजबूत और विश्वसनीय
15वें वित्त आयोग के चेयरमैन एन. के. सिंह ने इस मुद्दे पर कहा कि नई जीडीपी श्रृंखला ज्यादा विश्वसनीय है। यह वैश्विक मानकों के अनुरूप है और इसमें उत्पादक मूल्य सूचकांक की नई श्रृंखला का इस्तेमाल किया गया है। जीडीपी अनुमान तैयार करने में 300 से अधिक अलग-अलग मूल्य डिफ्लेटर का इस्तेमाल किया जाता है। अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों और उत्पादों की कीमतों में बदलाव को ज्यादा बारीकी से शामिल किया जा सकता है और सटीकता बढ़ती है।
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