
नकद मुआवजे के बदले देंगे टीडीआर का लाभ
अभी बोगदों में लगता है जाम, आयुक्त ने किया निरीक्षण, मास्टर प्लान की सड़कों में पेयजल, ड्रेनेज सहित अन्य उपयोगी सेवाओं के कार्य में भी तेजी लाने के निर्देश
इंदौर। बायपास (bypass) के निर्माण से लेकर कुछ समय तक कंट्रोल एरिया (control area) 45 मीटर निर्धारित किया गया था, जिसके चलते बायपास के दोनों तरफ सर्विस रोड (service road) के बाद नगर तथा ग्राम निवेश द्वारा जो भी अभिन्यास मंजूर किए जाते रहे वे 45 मीटर कंट्रोल एरिया के आधार पर ही रहे। इसके बाद शासन की अनुमति से कंट्रोल एरिया को आधा यानी साढ़े 22 मीटर कर दिया गया। मौजूदा सर्विस रोड को फोरलेन करने की कवायद बीते कई सालों से चल रही है और केन्द्र सरकार को भी इसका प्रोजेक्ट भेजा गया, तो एक हिस्से पर नगर निगम ने सर्विस रोड चौड़ीकरण का काम शुरू किया।
इंदौर बायपास की दोनों तरफ की 30 किलोमीटर की सर्विस रोड पर ही सबसे अधिक यातायात जाम रहता है। खासकर संकरे बोगदों के कारण सबसे अधिक फजीहत रहती है। हालांकि नेशनल हाईवे द्वारा चार फ्लायओवरों का निर्माण बायपास पर कराया जा रहा है, जिसमें राऊ जंक्शन फ्लायओवर शुरू हो चुका है, तो एमआर-10 फ्लायओवर की भी एक साइड से यातायात शुरू किया है। दूसरी तरफ सर्विस रोड को चौड़ा करने की कवायद भी बीते कई साल से चल रही है। तत्कालीन कलेक्टर मनीष सिंह ने कंट्रोल एरिया को साढ़े 22 मीटर करने का प्रस्ताव शासन को भिजवाया था, जिस पर कुछ समय पूर्व सहमति हुई और अब नगर तथा ग्राम निवेश इसी आधार पर अभिन्यास मंजूर कर रहा है। वहीं नगर निगम द्वारा योजना 140 और कनाड़िया का जो बोगदा है, उसके सर्विस रोड के पास 150-150 मीटर की रोड कंट्रोल एरिया में बना रहा है। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने कल योजना 140 से डीपीएस स्कूल तक के अंडरपास का अवलोकन भी किया और साढ़े 22 मीटर के कंट्रोल एरिया में जो निजी जमीनें सर्विस रोड निर्माण के लिए अधिग्रहित की जाएगी, उससे जमीन मालिकों को नकद मुआवजे के बदले टीडीआर/एफएआर दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि नगर निगम अभी जिन मास्टर प्लान की 23 सड़कों का निर्माण और चौड़ीकरण कर रहा है उसमें भी जिन बाधक मकानों-दुकानों और अन्य निर्माणों को तोड़ा जा रहा है उसके बदले टीडीआर सर्टिफिकेट दिए जा रहे हैं। इसी तरह टीडीआर का लाभ बायपास के दोनों ओर साढ़े 22 मीटर के कंट्रोल एरिया में भी दिया जाएगा। दूसरी तरफ बायपास पर फोरलेन सर्विस रोड का प्रोजेक्ट 700 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है और इसके निर्माण की सहमति केन्द्र सरकार ने अभी तक नहीं दी है, जबकि बायपास पर आवासीय, व्यावसायिक सहित तमाम गतिविधियां बढ़ती जा रही है और अब एक तरह से यह शहर का ही रोड हो गया है। नेशनल हाईवे ने हालांकि पूर्वी और पश्चिमी बायपास की योजना पर भी काम शुरू किया है। उसमें भी लेकिन जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों का विरोध जारी है और हाईकोर्ट में कई याचिकाएं चल रही है। इंदौर के मास्टर प्लान के आधार पर बायपास के दोनों तरफ 45-45 मीटर का बफर झोन रखा गया, जिसे आम बोलचाल की भाषा में कंट्रोल एरिया कहा जाता है। इसके बाद 2022 में साढ़े 22 मीटर कंट्रोल एरिया रखने और मिक्स लैंड यूज के प्रस्ताव को भेजा गया, जिसे नगर तथा ग्राम निवेश ने मंजूरी भी दे दी।
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