
उज्जैन। भाद्रपद माह के दूसरे सोमवार को भगवान महाकाल की शाही सवारी में सिंहस्थ-2028 की झलक खास आकर्षण रही। वहीं सवारी मार्ग पर एक लाख वर्गफीट से अधिक क्षेत्र में बनाई गई विशाल रंगोली ने श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा।
शाही सवारी में भगवान महाकाल के छह स्वरूप शामिल रहे। रजत पालकी में चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, गरुड़ रथ पर शिव-तांडव, नंदी रथ पर उमा-महेश, डोल रथ पर होल्कर स्टेट के मुखारविंद और बैलगाड़ी में सप्तधान के मुखारविंद नगर भ्रमण पर निकले। मंदिर से निकलते ही सशस्त्र बल के जवानों ने बाबा महाकाल को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस बार शाही सवारी में सिंहस्थ महाकुंभ को केंद्र में रखकर झांकियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां तैयार की गई थीं। इनमें सिंहस्थ की परंपरा, आध्यात्मिकता और उज्जैन की धार्मिक विरासत को दर्शाया गया। साथ ही 84 महादेव की विशेष प्रस्तुति ने उज्जैन की प्राचीन शिव उपासना को जीवंत कर दिया। झांकियों के जरिए सिंहस्थ-2028 की तैयारियों और उज्जैन की आध्यात्मिक पहचान की झलक भी दिखाई गई।सवारी मार्ग पर एक लाख वर्गफीट से अधिक क्षेत्र में विशाल रंगोली तैयार की गई। इसमें सिंहस्थ महाकुंभ, भगवान महाकाल की दिव्यता और भारतीय संस्कृति को रंगों के माध्यम से उकेरा गया। सवारी आगे बढ़ती गई और श्रद्धालु रंगोली के अलग-अलग स्वरूपों को मोबाइल कैमरों में कैद करते नजर आए। सवारी के दौरान 15 ड्रोन से शहनाई द्वार, रामघाट और दत्त अखाड़ा सहित प्रमुख स्थानों पर पुष्पवर्षा की गई। 500 किलो से अधिक फूलों की बारिश ने सवारी के दृश्य को और भव्य बना दिया। सवारी परंपरागत मार्ग से रामघाट पहुंची। यहां मां क्षिप्रा के जल से पालकी में विराजित चंद्रमौलेश्वर और हाथी पर सवार मनमहेश का पूजन किया गया। इसके बाद पालकी गोपाल मंदिर पहुंची, जहां सिंधिया स्टेट की परंपरा के अनुसार श्री चंद्रमौलेश्वर का पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद सवारी पटनी बाजार और गुदरी चौराहा होते हुए रात करीब 8.30 बजे वापस महाकाल मंदिर पहुंची।
10.20 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
शाही सवारी के दौरान सवारी मार्ग पर करीब 10.20 लाख श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के छह स्वरूपों के दर्शन किए। मंदिर प्रबंध समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चलित रथों पर एलईडी के माध्यम से सवारी का लाइव प्रसारण भी किया। फ्रीगंज, नानाखेड़ा और दत्त अखाड़ा सहित अन्य क्षेत्रों में भी श्रद्धालुओं ने लाइव प्रसारण के जरिए सवारी के दर्शन किए।
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