
उज्जैन। शहर में गणेशोत्सव की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। बंगाली मूर्तिकार अपने हाथों से मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं का निर्माण कर रहे हैं। इस साल जहां मिट्टी की प्रतिमाओं की लागत बढऩे से दाम बढ़े हैं, वहीं प्रतिमाओं की मांग भी बढ़ी है। इंदौर में ही बंगाल के मूर्तिकारों ने 3 महीने की मेहनत के बाद उज्जैन के महाकाल इंटरनेशनल चौराहे पर विराजने वाले बप्पा तैयार किए हैं। इस साल 7 क्विंटल हल्दी की गांठों से प्रतिमा को सजाया गया है।
शहर में जगह-जगह सजे बप्पा, पसंद अपनी-अपनी
बप्पा के आगमन में अब कम ही दिन बचे हैं। ऐसे में उज्जैन में सड़कों के किनारे बप्पा की प्रतिमाओं की दुकानें पूरी तरह सजकर तैयार हैं। शहर के अलग-अलग हिस्सों में प्रतिमाओं की बिक्री के लिए अस्थायी बाजार सजे हैं। कोयला फाटक, फ्रीगंज सिंधी कॉलोनी, दौलतगंज इंदौरगेट सहित कई इलाकों में सड़क किनारे एक से बढ़कर एक गणेश प्रतिमाएं नजर आ रही हैं। किसी स्टॉल पर छोटी प्रतिमा बच्चों को आकर्षित कर रही है तो कहीं बड़े आकार के गणेश लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। मिट्टी और ईको-फ्रेंडली प्रतिमाओं के साथ पारंपरिक से लेकर अलग-अलग भाव-भंगिमा और स्वरूप में तैयार किए गए गणेश भी हैं। शाम होते ही इन स्टॉलों पर परिवारों की आवाजाही बढ़ रही है और लोग स्थापना के लिए अपनी पसंद के बप्पा चुनने में जुटे हैं।
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