
जबलपुर। विद्या भारती के विद्यालयों में बेहतर परीक्षा परिणाम संगठन की उपलब्धि जरूर है, लेकिन उसका अंतिम लक्ष्य केवल अंक और प्रमाण-पत्र नहीं, बल्कि बालकों में भारत की मिट्टी, संस्कृति और परंपराओं के संस्कार विकसित कर उन्हें श्रेष्ठ नागरिक बनाना है। बालक के मन में परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपनत्व का भाव जागे और आवश्यकता पडऩे पर वह अपना सर्वस्व देश के लिए समर्पित करने को तैयार रहे, इसी उद्देश्य से विद्या भारती निरंतर कार्य कर रही है।
यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल ने जबलपुर में नरसिंह मंदिर के पास स्थित सरस्वती शिक्षा परिषद कार्यालय के रोशनलाल सक्सेना सभागार में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के समापन अवसर पर कही। डॉ. कृष्णगोपाल ने कहा कि विद्या भारती के विद्यालयों में पुस्तकीय ज्ञान के साथ विद्यार्थियों में आध्यात्मिक भाव जागृत करने पर भी जोर दिया जा रहा है। पंचकोषीय विकास की अवधारणा के माध्यम से बालकों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक विकास का प्रयास किया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में भी विद्या भारती महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अब शिक्षा के साथ संस्कारों के इस अभियान को देशभर में और व्यापक रूप देने की आवश्यकता है।
685 जिलों तक पहुंचा शिक्षा का अभियान
अखिल भारतीय महामंत्री देशराज शर्मा ने बताया कि विद्या भारती का कार्य देश के 685 जिलों में संचालित हो रहा है। करीब 24 हजार औपचारिक एवं अनौपचारिक विद्यालयों में 37 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जबकि 1 लाख 70 हजार से अधिक शिक्षक अध्यापन कार्य से जुड़े हैं। देशभर में 280 आवासीय तथा 1041 जनजातीय विद्यालय भी संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आगामी अखिल भारतीय खेलकूद समारोह गाजियाबाद, संस्कृति महोत्सव कुरुक्षेत्र, विज्ञान मेला गोरखपुर, गणित मेला धनबाद तथा टेकाथोन-3 आईआईटी रुड़की में आयोजित किया जाएगा।
‘इंडिया से भारत की ओर’ यात्रा का प्रतिरूप
बैठक की अध्यक्षता कर रहे विद्या भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रविन्द्र कान्हेरे ने कहा कि तीन दिनों तक चली बैठक में संगठन के कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। कार्य प्रभावी हुआ है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। उन्होंने विद्यालयों के डिजिटलाइजेशन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सतत प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्या भारती के 75 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं और संगठन की यह यात्रा ‘इंडिया से भारत की ओरÓ बढऩे की यात्रा का एक प्रतिरूप है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved