
- ओपीडी की भीड़ का होगा डिजिटल समाधान, लम्बी कतारों से मिलेगा छुटकारा
जबलपुर। जबलपुर जिले के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों को पेपरलेस और डिजिटल बनाने की मुहिम तेज गति पकड़ चुकी है। इसी कड़ी में लेडी एल्गिन नाम से विख्यात रानी दुर्गावती अस्पताल को पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत हॉस्पिटल इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम यानी एचएमआईएस से सीधे जोडऩे का फैसला लिया गया है। इस पूरी योजना का मूल उद्देश्य अस्पताल परिसर में रोजाना उमडऩे वाले मरीजों के भारी दबाव को नियंत्रित कर भीड़ प्रबंधन को सुगम बनाना है।
जिला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देश मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने तकनीक आधारित ढांचे की स्थापना का काम तेज कर दिया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवीन कोठारी ने स्पष्ट किया है कि पर्ची काउंटर डिजिटल होते ही जांच और उपचार हेतु आने वाले सभी आम नागरिकों को अभूतपूर्व राहत मिलेगी।प्रशासन द्वारा तैयार की गई आधुनिक रूपरेखा के दायरे में केवल एल्गिन ही नहीं बल्कि जिले के कई अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र भी आ रहे हैं। इस पायलट चरण में विक्टोरिया अस्पताल, मनमोहन नगर सिविल अस्पताल, पनागर, पाटन और कुंडम स्वास्थ्य केंद्रों को भी तकनीकी तौर पर शामिल किया गया है। स्वास्थ्य प्रबंधन के क्षेत्र में सबसे पहले इस नवाचार का सफल प्रयोग जिला अस्पताल में किया गया था, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद अब इसका दायरा अन्य उपनगरीय एवं ग्रामीण अंचलों के बड़े अस्पतालों तक चरणबद्ध ढंग से फैलाया जा रहा है।स्वास्थ्य संस्थान के आंतरिक आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में यहां रोजाना 300 से 400 नागरिक बाह्य रोगी विभाग यानी ओपीडी में चिकित्सीय परामर्श और प्राथमिक जांच के उद्देश्य से पहुंचते हैं। इसके अलावा 50 से 60 मरीज नियमित रूप से भर्ती होकर उपचार प्राप्त करने के लिए आईपीडी में दाखिल होते हैं। विगत कुछ वर्षों में आबादी के अनुपात में यहां आने वाले लोगों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। इस निरंतर बढ़ते दबाव के कारण परिसर में सुबह से ही लंबी कतारें लग जाती हैं।विस्तृत पंजीकरण प्रक्रिया धीमी होने के कारण नियमित जांच हेतु आने वाली माताओं और महिलाओं को घंटों खड़े रहकर भारी शारीरिक असुविधा का सामना करना पड़ता था। आधुनिक सॉफ्टवेयर लागू होते ही कागजी खानापूर्ति का दौर समाप्त हो जाएगा और हर आगंतुक का विवरण स्क्रीन पर एक क्लिक में दर्ज होगा। इससे परामर्श कक्षों के बाहर अनावश्यक ठहराव रुकेगा और चिकित्सा कर्मियों की कार्यक्षमता भी सुधरेगी।