
नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश(Uttar Pradesh) विधानसभा चुनाव(Election)2027 की तैयारियों के बीच क्रिकेटर मोहम्मद शमी(Mohammad Shami)और राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी(Jayant Chaudhary) की मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है। दिल्ली में हुई इस मुलाकात के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या शमी खुद राजनीति(Politics) में कदम रखने की तैयारी कर रहे हैं या उनके बड़े भाई मोहम्मद हसीब को चुनाव मैदान(Election Field) में उतारने की योजना है।
जयंत चौधरी और मोहम्मद शमी की मुलाकात की तस्वीर सामने आने के बाद अमरोहा विधानसभा सीट को लेकर अटकलें तेज हुई हैं। शमी का संबंध अमरोहा से है और वह अमरोहा सदर तहसील के सहसपुर अलीनगर के रहने वाले हैं। ऐसे में उनकी राजनीतिक शुरुआत के लिए गृह क्षेत्र का नाम चर्चा में आना स्वाभाविक माना जा रहा है।
मुलाकात को लेकर यह चर्चा भी है कि अमरोहा सीट से शमी या उनके भाई के चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर बातचीत हुई। हालांकि, शमी के चुनाव लड़ने या उनके भाई को उम्मीदवार बनाए जाने की कोई औपचारिक घोषणा अभी सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल इसे संभावनाओं और राजनीतिक चर्चाओं के तौर पर ही देखा जा रहा है।
मोहम्मद शमी के बड़े भाई मोहम्मद हसीब का नाम भी इस चर्चा में सामने आया है। उनके बारे में बताया जा रहा है कि वह स्थानीय स्तर पर सक्रिय हैं और लंबे समय से राजनीति में आने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में यदि शमी खुद चुनावी मैदान में नहीं उतरते हैं तो उनके भाई के नाम पर विचार किए जाने की संभावना चर्चा का हिस्सा बनी हुई है।
अमरोहा विधानसभा सीट का अपना अलग राजनीतिक महत्व है। यहां से समाजवादी पार्टी के महबूब अली 2002 से लगातार विधानसभा चुनाव जीतते आ रहे हैं। 2022 के चुनाव में भी उन्होंने भाजपा के राम सिंह को बड़े अंतर से हराया था। महबूब अली को 1,28,735 वोट मिले थे, जबकि राम सिंह के खाते में 57,699 वोट आए थे।
अमरोहा सीट के सामाजिक समीकरण भी इस राजनीतिक चर्चा में महत्वपूर्ण हैं। क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी संख्या है और तुर्क बिरादरी की भी महत्वपूर्ण मौजूदगी बताई जाती है। मोहम्मद शमी इसी समुदाय से आते हैं। ऐसे में उनके नाम को स्थानीय सामाजिक और चुनावी समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
वहीं, भाजपा और आरएलडी के बीच गठबंधन की मौजूदा स्थिति को देखते हुए अमरोहा सीट को लेकर भी भविष्य में तस्वीर बदल सकती है। यदि सीट आरएलडी के हिस्से में आती है तो उम्मीदवार चयन को लेकर चर्चा और तेज हो सकती है। हालांकि, सीट बंटवारे और उम्मीदवार के नाम पर अभी अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।
शमी की क्रिकेट स्थिति भी इस घटनाक्रम के बीच चर्चा में है। उन्होंने भारत के लिए अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 9 मार्च 2025 को न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था। इसके बाद से वह भारतीय टीम से बाहर हैं। इसी दौरान जयंत चौधरी से उनकी मुलाकात ने उनके भविष्य को लेकर नई अटकलों को जन्म दिया है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि शमी स्वयं चुनावी राजनीति में उतरेंगे, उनके भाई को मौका मिलेगा या मुलाकात का उद्देश्य चुनावी राजनीति से अलग था। शमी या आरएलडी की ओर से औपचारिक घोषणा होने के बाद ही उनकी राजनीतिक भूमिका की तस्वीर स्पष्ट होगी।
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